विश्व शांति एवं जन कल्याण यात्रा चंबल के महाकाल धूमेश्वर धाम से महाकाल तक पदयात्रा,ब्यावरा में नवां पड़ाव।

विश्व शांति एवं जनकल्याण के पावन उद्देश्य से महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 अनिरुद्धवन महाराज के सानिध्य में धूमेश्वर धाम से लेकर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन तक विशाल पदयात्रा की जा रही जिसका नवां पड़वा ब्यावरा रहा है।
यह यात्रा मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में भितरवार के पास सिंध और पार्वती नदी के संगम पर स्थित एक प्राचीन और सिद्धपीठ है। डबरा से लगभग 27 किमी दूर स्थित यह मंदिर, अपनी स्वयंभू शिवलिंग (नदी से निकली पिंडी) और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, जिसे मान्यता अनुसार ओरछा के राजा वीर सिंह ने एक ही रात में बनवाया था। ये भितरवार के पास स्थित धूमेश्वर धाम से प्रारंभ हुई है और प्रतिदिन श्रद्धालुओं के उत्साह के साथ आगे बढ़ रही है।
शुक्रवार रात पदयात्रा का नवां पड़ाव मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा में स्थित मानस हायर सेकेंडरी स्कूल में हुआ, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने रात्रि विश्राम किया।

इस दौरान दंदरौआ सरकार के मुख्य महंत महामंडलेश्वर संत रामदास महाराज का आगमन हुआ। उन्होंने पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को झाड़ा लगाकर आशीर्वाद दिया तथा रामधुन के माध्यम से उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की। उनके प्रवचन के दौरान संतों की महिमा, परोपकार एवं जीवन के चक्र को समझाने वाले उपदेशों ने वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

महंत संत रामदास महाराज ने पर्वत, नदी, धरती, वृक्ष एवं संतों को प्रकृति का वह स्वरूप बताया जो सदैव परहित के लिए कार्यरत रहता है। उन्होंने कहा कि संत वही है जो स्वयं चलकर समाज कल्याण का कार्य करे और जनमानस को सही मार्ग दिखाए। यह पदयात्रा भी उसी परंपरा का जीवंत उदाहरण है,जो विश्व शांति,जनकल्याण और सनातन धर्म के ध्वज को ऊँचा रखने के उद्देश्य से निकाली गई है।
दंदरौआ धाम मध्य प्रदेश के भिंड जिले (मेहगांव तहसील) में स्थित एक प्रसिद्ध और चमत्कारिक हनुमान मंदिर है, जिसे ‘डॉक्टर हनुमान’ धाम के रूप में जाना जाता है। यहाँ हनुमान जी की गोपी वेश धारी प्रतिमा है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से पूजा और नारियल चढ़ाने से असाध्य शारीरिक व मानसिक रोग दूर होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती।
कार्यक्रम के दौरान मंडलेश्वर अनिरुद्धवन महाराज ने बताया कि पदयात्रा 25 मार्च को पवित्र स्थल उज्जैन पहुंचेगी,जहाँ महाकाल के दर्शन के साथ इसका समापन होगा। उन्होंने कहा कि ग्वालियर-चंबल संभाग सहित विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर आनंदमयी अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं। हर कदम पर भगवान का स्मरण होने से मानसिक शांति मिलती है और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह यात्रा अत्यंत लाभकारी है। शनिवार सुबह पदयात्री ब्यावरा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुई उज्जैन की ओर प्रस्थान किया।
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