Bhopal MP Khulasa || एमपी में नहीं थम रही पत्रकारों पर हमले की घटना, दो दिनों में तीन को बनाया निशाना, पुलिस की उदासीनता पर उठ रहे सवाल

मध्य प्रदेश में 2 दिनों में तीन पत्रकारों पर हमला हुआ है। इस घटना से मीडियाकर्मियों में आक्रोश है। पुलिस के एक्शन पर भी सवाल खड़ा हो रहा है। पहले नरसिंहपुर में पत्रकार पर तलवार से हमला हुआ और अब भोपाल में बीच सड़क पर लाठी डंडों से पीटा गया।

भोपाल: मध्य प्रदेश में मीडियाकर्मियों पर लगातार हो रहे हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को नरसिंगपुर के करेली थाना क्षेत्र में पत्रकार बृजेश दीक्षित पर हुए हमले की चोटें अभी भरी भी नहीं थीं कि रविवार रात भोपाल में दो और पत्रकारों पर जानलेवा हमला हो गया।

दरअसल, पूरा घटना होशंगाबाद रोड स्थित पारस हर्मिटेज के पास की है, जहां रिपोर्टिंग से लौट रहे पत्रकार विशेष कुमार और विजय चौधरी पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने जान लेने की नीयत से हमला कर दिया। घायल पत्रकारों का कहना है कि 12 से 14 अज्ञात बाइक सवारों ने उनकी बाइक के सामने अचानक अपनी बाइक लगा दी। वे साइड से आगे निकले तो बाइक सवारों ने घेर कर उन पर चाकू से हमला कर दिया। उन्हें बाइक से खींचकर नीचे गिराकर मारने लगे। ईंट- पत्थर और डंडों से दोनों पत्रकारों को अधमरा होने तक पीटा। पत्थर मारकर उनकी बाइक भी तोड़ दी। मारपीट देख भीड़ जमा होने लगी जिसके बाद वे सभी बदमाश मौके से फरार हो गए। संयोगवश वहां से गुजर रहे उनके एक पड़ोसी ने उनके दोस्तों को फोन कर घटना के बारे में बताया और अस्पताल पहुंचा।

पुलिस की उदासीनता पर उठ रहे सवाल

हमले में घायल पीड़ितों का कहना है कि सूचना मिलने के बावजूद मिसरोद थाना पुलिस का रवैया बेहद निराशाजनक रहा। न तो घटनास्थल से खून से सने सबूत (डंडे, लाठियां आदि) को सुरक्षित किया गया और न ही हमलावरों की तत्काल तलाश की गई। जब वे खुद फरियादी बनकर थाने पहुंचे तो उन्हें अगली सुबह 8 बजे आने को कह दिया गया। काफी आग्रह के बाद मामूली धाराओं में मामला दर्ज किया गया और गंभीर धाराएं मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद जोड़ने की बात कही गई।

लगातार हो रहे हमले पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मूल आत्मा पर चोट है। यदि समय रहते दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो यह प्रवृत्ति हर दिन ऐसे अपराधों के पुनरावृति को निमंत्रण देती रहेंगी।

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One Response

  1. मुलताई में कुछ बैंक, कुछ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बिना पार्किंग के संचालित हो रहे हैं, तथा कुछ लोगों ने पार्किंग के लिए जगह बहुत कम दी है। जो वाहन पार्किंग के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे ग्राहको को वाहन खड़े करने में बहुत परेशानी होती है। आखिर बिना पार्किंग के बैंक कैसे संचालित हो रहे हैं। ये तो नियमों का उल्लघंन हो रहा है। सड़क किनारे वाहन खड़े करने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। कई बार दुर्घटना तक हो जाती है। सरकारी जमीन पर वाहन खड़े हो रहे हैं ।जबकि जिस भवन मे बैंक संचालित होती है उसकी स्वयं की पार्किंग होना जरूरी है। मुलताई में संचालित सभी बैंकों की पार्किंग व्यवस्था की जांच होना चाहिए।
    कुछ बेसमेंट बिना अनुमति के बने हैं। कुछ व्यावसायिक भवनों के नक्शे बिना पार्किंग दिए पास हुए हैं। कुछ लोगों ने सरकारी जमीन पर पक्का अतिक्रमण कर लिया है। जांच होना चाहिए।
    रवि खवसे, मुलताई (मध्यप्रदेश)

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