10 दिन बाद भी नहीं मिला न्याय तो ग्रामीणों ने किया जमकर धरना प्रदर्शन

बैरसिया खुलासा रामबाबू मालवीय


बैरसिया। 10 दिन बाद भी नहीं मिला न्याय तो केवट समुदाय एवं ग्रामीण लोगों द्वारा तहसील कार्यालय एवं बस स्टैंड चौराहे पर धरना प्रदर्शन किया गया। आपको बता दें कि .एन.एम.की लापरवाही से बीते दिनों हुई जच्चा-बच्चा की मौत के बाद ग्रामीणों ने बैरसिया में तहसील कार्यालय में धरना प्रदर्शन के बाद चक्काजाम कर दिया। आपको बता दें कि धरना प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष सहित मासूम बच्चे ,बच्चियां भी स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारे लगाते नज़र आये। प्रदर्शन कारी न्याय दो, न्याय दो, रिश्वत लेना बंद करो, बंद करो, के अलावा भोपाल सीएमएचओ के खिलाफ नारे लगाते रहे। बाद में तहसीलदार लाखन चौधरी ने आवेदन लेकर उचित न्याय दिलाने भरोसा दिलाया और थाना प्रभारी अरुण शर्मा पुलिस बल सहित मौके पर पहुंचकर समझाइस देकर जाम को खत्म कराया गया।दरअसल बेरसिया तहसील के सुहाया में स्थित सामुदायिक उप स्वास्थ्य केंद्र है। जहाँ शिवानी केवट और उसके शिशु की मृत्यु हो गईं थी। जिसके बाद शिवानी के परिवार वालों ने शिकायत की थी। हमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर ,नर्स, और सहायकों द्वारा डिलेवरी कराने का लालच दिया गया और कहा कि हम 5 हजार रूपये अच्छे से डिलीवरी करवा देंगे। परिजनों ने कहा कि हमने ₹5000 भी दे दिए लेकिन अस्पताल की लापरवाही की वजह से जच्चा और बच्चा की तबीयत बिगड़ी और बाद में उन्हें भोपाल रेफर किया गया, इसके बाद जच्चा और बच्चा दोनों की मृत्यु हो गई, जिसकी शिकायत परिजनों ने अधिकारियों से की, लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला जब जाकर आज शिवानी के परिजन और केवट समुदाय का गुस्सा फूट पड़ा और बैरसिया बस स्टैंड पर चक्का जाम कर दिया,हालांकि प्रशासन की तरफ से लापरवाही करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को नोटिस दिया गया था, लेकिन नोटिस के बाद में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, अब बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इन जैसे स्वास्थ्य विभाग के लापरवाह अधिकारियों पर उच्च अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे, वही परिवार ने न्याय नहीं मिलने पर उग्र आंदोलन करने का ऐलान किया है, हमारा उन जिम्मेदार अधिकारियों से भी कहना है कि साहब करवाई कीजिए, नहीं तो आप जिस कुर्सी पर बैठे हैं उसे कुर्सी से उतर जाइए, आखिर कब तक न्याय के लिए पीड़ितों को दर-दर की ठोकर खाना पड़ेगा।

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