कौन हैं अमेठी से कांग्रेस प्रत्याशी किशोरी लाल शर्मा, जिन्होंने स्मृति को मात देकर लिया राहुल की हार का बदला

K.L. Sharma Amethi: कांग्रेस के प्रत्याशी किशोरी लाल शर्मा ने भाजपा की प्रत्याशी और निर्वतमान सांसद स्मृति ईरानी के खिलाफ निर्णायक जीत की बढ़त बना ली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार वह एक लाख 20 हजार वोट से आगे चल रहे हैं। इसके साथ ही सबकी नजरें गांधी परिवार के खासमखास रहे शर्माजी पर घूम गई हैं।

  • अमेठी लोकसभा से जीते किशोरीलाल शर्मा
  • स्मृति ईरानी को अमेठी लोकसभा से हराया
  • गांधी परिवार के खास सिपहसालार हैं शर्मा

अमेठी: उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर अमेठी में देखने को मिला। यहां कांग्रेस के प्रत्याशी किशोरी लाल शर्मा (K L Sharma) ने भाजपा की प्रत्याशी और निर्वतमान सांसद स्मृति ईरानी (Smriti Irani) के खिलाफ निर्णायक जीत की बढ़त बना ली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार वह एक लाख 20 हजार वोट से आगे चल रहे हैं। इसके साथ ही सबकी नजरें गांधी परिवार के खासमखास रहे शर्माजी पर घूम गई हैं। आखिर कौन है के एल शर्मा, जिन्होंने पिछले लोकसभा में राहुल गांधी की हार का बदला लिया है।

अमेठी से कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा गांधी परिवार के विश्वासपात्र हैं।

2024 के लोकसभा में उन्हें 415450 वोट हासिल हुए, जबकि स्मृति को 294581 वोट मिले। हालांकि अभी काउंटिंग जारी है। मूल रूप से पंजाब के लुधियाना के रहने वाले केएल शर्मा ने 40 साल पहले पूर्व पीएम राजीव गांधी के साथ विधानसभा क्षेत्र समन्वयक के रूप में राजनीतिक पारी शुरू की थी। इसके पहले वह नेहरू युवा केंद्र में पदाधिकारी थे।

साल 2004 से वह सोनिया गांधी के प्रतिनिधि के रूप में रायबरेली क्षेत्र में चुनाव संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे थे।

केएल शर्मा ने 1983 में राजीव गांधी के साथ रायबरेली और अमेठी में कदम रखा था। राजीव के निधन के बाद गांधी परिवार से उनके रिश्ते पारिवारिक हो गए। जब गांधी परिवार ने यहां से चुनाव लड़ना बंद किया तो भी शर्मा कांग्रेस पार्टी के सांसद के लिए काम करते रहे।

केएल शर्मा का अक्सर रायबरेली और अमेठी में आना-जाना बना रहा। हालांकि, जब पहली बार सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति में उतरीं और अमेठी से चुनाव लड़ीं तो शर्मा उनके साथ अमेठी आ गए। जब सोनिया ने राहुल के लिए अमेठी सीट छोड़ दी और खुद रायबरेली आ गईं तो शर्मा ने दोनों सीटों की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। वक्त के साथ लोग कांग्रेस को छोड़ते गए, लेकिन शर्मा की निष्ठा में कोई कमी नहीं आई। कभी वह बिहार के प्रभारी रहे तो कभी पंजाब कमिटी के सदस्य बने और एआईसीसी के मेंबर भी रहे। कई बार चुनावी बागडोर उनके हाथों में रही लेकिन अब जाकर उन्हें गांधी परिवार का करीबी होने का इनाम मिला है।

रायबरेली में सोनिया गांधी की अनुपस्थिति में केएल शर्मा ने उनके कार्यालय में आने वाले हर एक जरूरतमंद की हरसंभव मदद की। इसके बाद के चुनावों में उनके कुशल प्रबंधन का ही नतीजा रहा कि सोनिया को शानदार जीत मिली। कांग्रेस के प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने बताया कि राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने सरकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए युवा कांग्रेस के लोगों को लगाया था। तब अमेठी में किशोरी लाल को कोआर्डिनेटर बनाया गया था। उनका रायबरेली और अमेठी से 40 से ज्यादा का पुराना रिश्ता है। उन्हें घर घर में लोग जानते हैं।

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