
आयुक्त अभिनव गोयल से उम्मीदें
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका: क्षेत्र में सड़कों की दशा बद से बदतर होती जा रही है। जहां कभी सुगम आवागमन का प्रतीक मानी जाने वाली सड़कें थीं, वहां अब खड्डों की भरमार है। ये खड्डे न केवल यातायात की गति को अवरुद्ध करते हैं, बल्कि आम नागरिकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। बरसात के मौसम में तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब पानी से भरे खड्डों की गहराई का अंदाजा लगाना असंभव हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप दुर्घटनाओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या नवागत आयुक्त अभिनव गोयल इस दुरावस्था को सुधारने में सक्षम होंगे? क्या भ्रष्ट ठेकेदारों और लापरवाह कर्मचारियों पर लगाम लगाई जा सकेगी?
खड्डों की गहराई, भ्रष्टाचार की साजिश
कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र में सड़कों का निर्माण और रखरखाव महानगरपालिका के अधीन है, किंतु सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री की निम्न गुणवत्ता, ठेकेदारों द्वारा बरती गई घोर लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत ने सड़कों को खड्डों का जाल बना दिया है। कई सड़कें ऐसी हैं, जो गारंटी अवधि के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। यह स्थिति न केवल जनता के धन के दुरुपयोग को दर्शाती है, बल्कि प्रशासनिक अक्षमता और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को भी उजागर करती है।
बरसात के मौसम में खड्डों में पानी भर जाने से स्थिति और भी विकट हो जाती है। राहगीरों को खड्डों की गहराई का पता नहीं चलता, जिसके कारण दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री अक्सर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। हाल ही में डोंबिवली के कई इलाकों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां खड्डों के कारण वाहन पलट गए और नागरिकों को गंभीर चोटें आईं। यह सब तब हो रहा है, जब महानगरपालिका को सड़क रखरखाव के लिए मोटा बजट आवंटित किया जाता है। फिर यह राशि कहां जा रही है? यह सवाल हर नागरिक के मन में कौंध रहा है।
नए आयुक्त अभिनव गोयल से उम्मीदें और चुनौतियां
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका नए आयुक्त अभिनव गोयल ने हाल ही में कार्यभार संभाला है। उनके समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है सड़कों की दुर्दशा को ठीक करना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना। आयुक्त ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने और विकास कार्यों को गति देने का वादा किया है। किंतु यह कार्य इतना सरल नहीं है। ठेकेदारों और कर्मचारियों की सांठगांठ को तोड़ना, निर्माण कार्यों में पारदर्शिता लाना और सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना एक जटिल प्रक्रिया है।
नागरिकों की शिकायतें हैं कि सड़क निर्माण में ठेकेदारों द्वारा मानकों का पालन नहीं किया जाता। कई बार तो सड़कें बनने के कुछ महीनों बाद ही उखड़ने लगती हैं। इसके अतिरिक्त, रखरखाव के नाम पर होने वाले कार्य भी केवल कागजों तक सीमित रहते हैं। ऐसे में आयुक्त अभिनव गोयल को न केवल सड़कों की मरम्मत के लिए त्वरित कदम उठाने होंगे, बल्कि दोषी ठेकेदारों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी करनी होगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता
सड़कों की बदहाली का समाधान तभी संभव है, जब निर्माण कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। एक सुझाव यह है कि प्रत्येक सड़क निर्माण परियोजना के लिए एक साइन बोर्ड लगाया जाए, जिसमें ठेकेदार का नाम, निर्माण लागत, समयावधि और रखरखाव की जानकारी सार्वजनिक हो। इससे न केवल जनता को जानकारी मिलेगी, बल्कि ठेकेदारों और अधिकारियों पर जवाबदेही का दबाव भी बनेगा।नागरिकों का कहना है कि सड़कों की मरम्मत और निर्माण के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग बंद होना चाहिए। इसके लिए उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है। साथ ही, बरसात से पहले खड्डों की मरम्मत और जल निकासी की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
कल्याण-डोंबिवली की सड़कें आज भ्रष्टाचार और लापरवाही की कहानी बयां कर रही हैं। नए आयुक्त अभिनव गोयल के समक्ष यह सुनहरा अवसर है कि वे इस स्थिति को बदलें और जनता को सुरक्षित व सुगम सड़कों का तोहफा दें। किंतु इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, पारदर्शी कार्यप्रणाली और कठोर अनुशासन की आवश्यकता है। जनता की निगाहें नए आयुक्त अभिनव गोयल पर टिकी हैं, और उम्मीद है कि वे भ्रष्टाचार की खाई को पाटकर शहर को प्रगति के पथ पर ले जाएंगी।
क्राइम रिपोर्टर शुभम मिश्रा
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