मौसम के अनुकूल मसालों का प्रयोग करें : डॉ. लियाकत अली मंसूरी

मौसम के अनुकूल मसालों का प्रयोग करें : डॉ. लियाकत अली मंसूरी


ख़ुद को भुगतना पड़ता हैं परिणाम ____________

ज्यादातर चलन में देखा गया है कि लोग घर या बाहर के खाने में मसालों का प्रयोग मौसम के अनुरूप नहीं करते हैं जिसका परिणाम ख़ुद को भुगतना पड़ता हैं । आज का मनुष्य बहुत व्यस्तता के कारण खानपान में लापरवाही करते हुए देखा जा सकता हैं । मनुष्य व्यस्तता के कारण मसालों पर अनदेखा करके बाहरी पीसे हुए मिलावटी मसालें और फास्ट फूड का अधिकाधिक प्रयोग किया जा रहा हैं। व्यस्तम मनुष्य को यह देखने का भी समय नहीं है कि गर्मी के दिनों में भोजन में गर्म मसालों का प्रयोग क्यों किया जा रहा हैं जैसे _लाल मिर्च, दालचीनी, पीपली, अजवाइन, तेजपत्र,अदरक, लहसुन, केशर , जायफल , कलौंजी ,जावित्री,लौंग , हल्दी आदि , इसी तरह से शीतकालीन मौसम में ठंडे मसालों का प्रयोग नहीं किया जाता हैं जैसे _इलाइची , कसौरी मैथी,धनियां,सौंफ ,जीरा,काली मिर्च आदि ।
जबकि होना यह चाहिए कि मनुष्य को गर्मी के दिनों में ठंडे और शीतकालीम मौसम में गर्म मसालों का प्रयोग करना चाहिए । इससे मौसम के अनुरूप सही समय पर हमारे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी मिल जाते हैं जिससे शरीर की इम्युनिटी पॉवर बनी रहने से शरीर कई बीमारियों से लड़ सकता हैं । साथ ही शरीर के मिजाज़ से छेड़छाड़ भी नहीं होती हैं ।

हम ख़ुद ही शरीर को बीमार कर रहे हैं :

मौसम के अनुरूप मसालों के प्रयोग नहीं करने से हम ख़ुद ही शरीर को बीमार कर रहे हैं। ऐसा करने से शरीर में वात रोग, कफ रोग एवं पित्त रोगों को जन्म देते हैं जिससे गुर्दे के रोग जैसे_शुगर । ह्रदय रोग जैसे उच्च रक्त चाप, ब्लॉकेज, लकवा । पेट एवं मुख के रोग जैसे कब्ज , अल्सर । स्वांस रोग जैसे_अस्थमा, त्वचा रोग जैसे _बालों के रोग, अलर्जी । हार्मोनल असंतुलन जैसे _ओबेसिटी, शुक्राणु और टेस्टोस्टेरॉन की कमी ,गर्भपात , और कैंसर रोग । मस्तिष्क रोग जैसे_अवसाद , उन्माद जैसे रोग,नींद नहीं आना । आंखों की कमज़ोरी एवं नकसीर आना और अन्य बीमारियों को हम निमंत्रण दे रहे हैं।
मनुष्य का मिजाज़ अग्नि तत्वों पर निर्भर करता है गर्म मसालें अग्नि तत्वों को बढ़ाते हैं यानि मनुष्य के मिजाज़ को गर्म करते हैं । गर्म मसालों से पित्त बढता है जिसके कारण हृदय को उत्तेजित करते हैं, मूत्र को बढ़ाते हैं , बलगम पतला होता हैं , दस्त पतले होते हैं , अस्थमा बढ़ाते हैं , मुख छाले एवं अल्सर होते हैं , और मानसिक रोग जैसे अवसाद, उन्माद , नींद नहीं आना आदि , यूरिक एसिड को बढ़ने से जोड़ों के दर्द बढते हैं। इसी तरह से ठंडे मसालें अग्नि तत्वों को कम करते हैं ।

मौसम के अनुरूप मसालें नहीं खाने से मनुष्य के शरीर में ये विपरीत प्रभाव डालते हैं ।


आजकल देखने में आ रहा है कि ज्यादातर लोग चटपटा खाने से काली मिर्च का प्रयोग कम और लाल मिर्च का प्रयोग ज्यादा कर रहे हैं जिससे पर्याप्त विपेरिन की मात्रा शरीर को नहीं मिलने से हमारा शरीर कैंसर जैसे घातक बिमारी से नहीं लड़ पाता है। जिससे आजकल कैंसर रोग ज्यादा देखने में आ रहा हैं।
डॉ. लियाकत अली मंसूरी
यूनानी चिकित्सक
एस.एम.एस.अस्पताल
जयपुर

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