रीवा एमपी खुलासा//62वें आरटीआई राष्ट्रीय वेबिनार का हुआ आयोजन, देश के जाने माने चाइल्ड राइट्स एक्सपर्ट ने साझा किये अपने विचार, कहा भारत को चाइल्ड लेबर मुक्त करना हमारा उद्येश्य और लड़ते रहेंगे अंत तक

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62वें आरटीआई राष्ट्रीय वेबिनार का हुआ आयोजन, देश के जाने माने चाइल्ड राइट्स एक्सपर्ट ने साझा किये अपने विचार, कहा भारत को चाइल्ड लेबर मुक्त करना हमारा उद्येश्य और लड़ेंगे अंत तक

एक्सपर्ट्स ने माना की आरटीआई कानून के आने के बाद काफी जानकारी आई सामने, बाल अधिकारों की लड़ाई हुई काफी आसान, परन्तु सरकार के प्रयास नाकाफी

शैलेश गांधी ने कहा सूचना आयुक्त धारा 4 के तहत बाल अधिकारों और चाइल्ड लेबर की जानकारी करवाएं सार्वजनिक तो राहुल सिंह ने कहा हमारा प्रयास निरंतर जारी

आत्मदीप ने कहा हमारे कार्यकाल में कोई ऐसे बड़े मामले नहीं पहुचे आयोग यह पहला मौक़ा जब हम इस विषय पर विस्तार से कर रहे के  रहे चर्चा

   सूचना के अधिकार कानून को जन जन तक पहुचाने के प्रयास निरंतर जारी हैं. इस बीच प्रत्येक रविवार को आयोजित होने वाले 62वें राष्ट्रीय ज़ूम आरटीआई मीटिंग का आयोजन किया गया. इस बीच उपस्थित विशेषज्ञों ने अपने-अपने विचार साझा किये और बाल अपराध और बाल मजदूरी को रोकने के लिए अग्रिम कार्यवाही की अपील की. देश के विभिन्न कोनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी अपने-अपने अनुभव और प्रश्न साझा किये.

   कार्यक्रम की अध्यक्षता मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने किया जबकि मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गाँधी और विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व मप्र सूचना आयुक्त आत्मदीप उपस्थित थे. कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ताओं में दिल्ली से बाल अधिकारों के लिए लड़ने वाले चाइल्ड राइट्स लॉयर अनंत कुमार अस्थाना, महाराष्ट्र के विधायक भारती चाइल्ड राइट्स संस्था के फाउंडर ट्रस्टी संतोष शिंदे, एवी वलिगा मेमोरियल ट्रस्ट नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक अशोक कुमार झा और वरिष्ठ चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट श्री सुखदेव पटेल सम्मिलित रहे.

       62 वें एपिसोड के इस कार्यक्रम का संचालन और समन्वयन का कार्य आरटीआई हेल्पलाइन गुजरात की डायरेक्टर पंक्ति जोग, एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, नित्यानंद मिश्रा एवं फोरम फॉर फ़ास्ट जस्टिस के संयोजक प्रवीण पटेल ने किया.

  *आरटीआई और बाल अधिकारों को लेकर हुई चर्चा, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की संख्या बढाने में मिली मदद- अनत कुमार अस्थाना*


  मामले में सबसे पहले अनंत कुमार अस्थाना ने बोलते हुए कहा की सूचना के अधिकार अस्त्र का प्रयोग करते हुए बाल अधिकारिता के क्षेत्र में काफी काम किया जा सकता है. हमारे यहाँ मुख्य कानून जुवेनाइल जस्टिस एक्ट है जिसमे 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे को अपराध करने पर दण्डित करने के स्थान पर पुनर्वास किया जाता है. जैसे जिला से लेकर स्थानीय स्तर तक ऐसे केंद्र बने रहते हैं जहाँ इनका पुनर्वास किया जाता है. लीगल ऐड जिसमे विधिक सेवा प्राधिकरण भी सम्मिलित है ऐसे बच्चों के लिए ही काम करता है. उन्होंने बताया की जब बच्चों को जेल में डाला जाता है तो उनके मानशिक अवस्था पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है. कई बार जब जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में कम बाल अपराधी आते थे तो सरकार ने बोर्ड बंद करने के लिए प्रयास करने प्रारंभ किये जिसका उन्होंने विरोध भी किया था.

   आरटीआई के सन्दर्भ में उन्होंने बताया की सबसे पहले हमने जेजेबी से सम्बंधित आरटीआई लगाई तो तिहाड़ जेल से बच्चों की जानकारी मागी तो बताया गया की कोई बच्चा जेल नहीं गया. तब उन्होंने अपने प्रश्न को बदलकर जानकारी मागी की तिहाड़ जेल से बच्चा साबित करने के बाद कितने लोगों को बाल सम्प्रेषण गृह भेजा गया तो जबाब में 11 माह की जानकारी दी गयी और 119 लोगों का नाबालिग होते हुए बाल अपराधी होने की पुष्टि हुई थी. इसी प्रकार अन्य कई चिंताएं उन्होंने बालकों-बालिकाओं के विषय जाहिर की और बताया की जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इस पर कार्य किया और जेजेबी की संख्या बढ़ाई गयी.

*मुंबई में एक आरटीआई में बताया मात्र 4 बाल मजदूर, रेड में मात्र एक ही कम्पनी में मिले सैकड़ों, फिर कराई बड़ी कार्यवाही – संतोष शिंदे*

  कार्यक्रम में आगे अपने विचार रखते हुए महाराष्ट्र के विधायक भारती चाइल्ड राइट्स नामक संस्था के फाउंडर ट्रस्टी संतोष शिंदे ने बताया की एक बार उन्होंने लेबर डिपार्टमेंट में आरटीआई लगाई और जानकारी चाही तो बताया गया की मुंबई शहर में मात्र 4 बाल मजदूर हैं. चाइल्ड लेबर निरोधक और रेगुलेशन एक्ट 1986 में पूरे महाराष्ट में कितने कानूनी कार्यवाही हुई इस विषय पर जानकारी चाही तो पता चला की मात्र 16 केस ही दर्ज थे इससे इन इम्प्लीमेंटेशन एजेंसी की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़ा हो जाता है.

  उन्होंने बताया की 30 मई 2005 को हमने 01 जून को सबसे बड़ी रेड मुंबई में डाली जिसमे 750 पुलिशकर्मी और 300 कार्यकर्ता सम्मिलित थे जिसमे एक ही झटके में 10 मिनट में कई बाल मजदूर जब्त करवाए जिसमे कम्पनी के 119 अधिकारियों/कर्मचारियों के ऊपर प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही करवाई गयी थी. इसी प्रकार उन्होंने कई अनुभव् शेयर किये और बताया की कैसे आरटीआई के माध्यम से जानकारियाँ हासिल कर बड़ी कार्यवाहियां करवाई हैं.

  *कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड लेबर संस्था के माध्यम से चाइल्ड लेबर कम करने के चल रहे प्रयास- अशोक कुमार झा*

  अगले चरण में चाइल्ड राइट्स एक्सपर्ट, कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड लेबर एवं एवी वलिगा मेमोरियल ट्रस्ट नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक अशोक कुमार झा ने अपने विचार साझा करते हुए बताया की पूर्व केन्द्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गाँधी के मार्गदर्शन में स्लम के बच्चों के लिए राशन से लेकर सामान्य सी जानकारी के लिए भी आरटीआई लगाई और जानकारी प्राप्त किया. उन्होंने कहा की उनका एक छोटा सा ड्रीम है की यह देश बाल श्रम मुक्त हो और उनके लिए हम सबको प्रयास करते रहना पडेगा. श्री झा ने कहा की चाइल्ड लेबर खत्म नहीं हो रहा है और एक जगह से काम छोड़कर उन्हें दूसरे जगह लगाया जा रहा है. उन्होंने सीएसीएल की बात बताते हुए कहा की वह 23 राज्यों में काम कर रहे हैं और उनकी संस्था ट्रांसपेरेंट और डेमोक्रेटिक है.

   उन्होंने बताया की 2012 के आंकड़े उनके पास है जो यह बताते हैं 05 से 14 साल के लेबर में लगे हुए बच्चों की संख्या एक करोड़ 10 लाख थी जो की बाल मजदूरों के इंगेजमेंट की जानकारी मिलती है और यह काफी शर्मनाक और चौकाने वाले हैं. हालाँकि अभी जबकि 2021 चल रहा है और 10 वर्ष का समय बीतने वाला है यह आंकड़े काफी अधिक हो सकते हैं. पहले जब वह आरटीआई लगाते थे तो 30 दिन के भीतर जबाब मिल जाते थे लेकिन 2006 के बाद अब स्थितियां काफी दयनीय हो गयी हैं. अशोक कुमार झा ने कहा की लेबरनेट की जानकारी के अनुसार 2011 के सेन्सस के अनुसार 05 से 09 वर्ष के 15 लाख से अधिक बच्चे बाल मजदूरी कर रहे हैं.


  उन्होंने बताया की हमने 13 राज्यों में आरटीआई लगाईं थी और जिसमे से 11 राज्यों ने रेस्पोंस दिए जिसमे उन्होंने जानकारी मागी था की ढाबा, हॉस्पिटैलिटी और डोमेस्टिक सेक्टर में कितने बच्चे रेस्क्यू हुए, कितने बच्चे पुनर्वासित हुए इसकी संख्या मागी थी. इसके बाद उन्होंने पूंछा की कितने एम्प्लायर को प्रोसिक्यूट किया गया, और कितने एम्प्लायर पर पेनाल्टी लगाईं गयी और कितने कन्विक्शन हुए साथ में उन्होंने यह भी जानकारी मागी की सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अनुसार बच्चों के परिजनों को क्या कंपनसेशन दिए गए. अगले प्रश्न में पुनर्वास और रेस्क्यू के प्रोसेस की जानकारी मागी गयी थी. इस प्रकार अन्य कई बिन्दुओं पर जानकारी मागी गयी उसमे राज्य स्तरीय विभाग की जानकारी नहीं दी गयी और बताया गया की यह जानकारी आप जिले स्तरीय कार्यालयों से प्राप्त करें.

*बच्चों की दास्तान काफी दुखद, आयोग धारा 4 में जानकारी करवाए साझा – शैलेश गाँधी*

   कार्यक्रम में आगे मुख्य अतिथि और पूर्व केन्द्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गाँधी ने बताया की यह काफी दुखद रहा और बच्चों के अधिकारों के हनन को लेकर अलग अलग स्टोरी सामने आई हैं. आगे उन्होंने कहा की हर बात के लिए अलग से आरटीआई लगाने की जरुरत नहीं पड़नी चाहिए. हमे धारा 18(1)(एफ) के तहत जानकारी वेबसाइट पर डाले जाने के लिए इंसिस्ट किया जाना चाहिए और आयोग को शिकायत की जानी चाहिए. जब कोई चाइल्ड लेबर रेस्क्यू हुए तो किस नियोक्ता पर कार्यवाही हुई उसके नाम भी पोर्टल पर आना चाहिए. कमिश्नर को भी ऐसे अच्छे आदेश देने के लिए खुसी होनी चाहिए. उन्होंने यह भी बताया की अरविन्द केजरीवाल और अन्ना हजारे ने लोकपाल के लिए इतना बड़ा संघर्ष किया और लोकपाल भी बना लेकिन लोकपाल 2 वर्ष से अधिक समय से काम भी बीत रहा है लेकिन कहीं हो कुछ नहीं रहा. मप्र और हर जगह के कार्यकर्ता अपने अपने सूचना आयोग में शिकायतें करें और यह लागू करवाएं. उन्होंने बताया की सेक्शन 4 के तहत ज्यादा से ज्यादा जानकारी पब्लिक की जानी चाहिए. पंक्ति जोग ने बताया की 18 वर्ष से नीचे के बच्चे होने से यह जानकारी नहीं दी जाती है लेकिन इस छुपाने के नाम पर बहुत भ्रष्टाचार होता है इसके लिए क्या किया जाय तो शैलेश गाँधी ने बताया की यह जानकारी भले ही न दी जाए लेकिन उन नियोक्ता की जानकारी तो दी जानी चाहिए.

*धारा 4 के प्रावधान लागू करवाएं, पारदर्शिता से व्यवस्था में काफी सुधार संभव – राहुल सिंह*

कार्यक्रम के अध्यक्ष मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बताया की पूरे देश में ऐसी दयनीय स्थिति है की बच्चे चौराहों पर भीख मागते मिलते हैं, चाहे वह सीएम हाउस है अथवा सचिवालय हर जगह बच्चे भीख मागते हैं और ढाबा, दुकानों में काम करते हैं. पंक्ति जोग ने राईट टू एजुकेशन के लेकर पूंछा की 25 प्रतिशत बच्चों की जानकारी चाही गयी तो कुछ बताया नहीं जाता है. एजुकेशन सिस्टम में गरीब बच्चों के लिए कोई जगह नहीं है. राहुल सिंह ने बताया की यह सब जानकारी धारा 4 के तहत सार्वजनिक होनी चाहिए. राशन, फीस आदि से सम्बंधित सभी जानकारी पोर्टल पर रखी जानी चाहिए क्योंकि जब तक जानकारी सामने नहीं आती तब तक गडबडी सामने नहीं आती और पारदर्शी व्यवस्था नहीं बन पाती. यदि सेक्शन 4 के तहत जानकारी पब्लिक डोमेन में आ जाए तो पब्लिक ही सरकार के हाँथ नाक और कान हो जायेंगे. लेकिन हमे भी यह नहीं समझ आता की यह जानकारी सेक्शन 4 के तहत साझा क्यों नहीं की जाती. इस प्रकार उन्होंने धारा 4 के प्रावधान लागू होने पर बल दिया और कहा की पारदर्शिता के लिए अत्यंत आवश्यक है.

*बच्चों के अधिकारों को लेकर मेरे सूचना आयुक्त रहते नहीं आये बड़े मामले- आत्मदीप*

  पूर्व राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने बताया की कैलाश सत्यार्थी हमारे मप्र के विदिशा निवासी हैं जिन्होंने बाल मजदूरी बालकों के अधिकारों के संरक्षण के लिए काफी कार्य किया. उनके ऊपर कई हमले भी हुए लेकिन कार्य जारी रखा और उनको नोबल पुरुष्कार से सम्मानित किया गया. इसी प्रकार उन्होंने नारायण सेवा संस्थान और साध्वी ऋतंभरा द्वारा चलाये जा रहे अच्छे प्रयासों का भी जिक्र किया. चूँकि बच्चे देश का भविष्य हैं इसलिए बच्चों के अधिकार और संरक्षण करना वहां की सरकार का प्रमुख दायित्व होना चाहिए. अमेरिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा की वहां का नियम कायदे इस मामले में काफी सख्त हैं और बच्चों को बहुत अधिकार और संरक्षण प्राप्त हैं. महिला बाल विकाश विभाग से जुड़े आंगनवाडी केन्द्रों पर प्रश्न खड़ा करते हुए उन्होंने बताया की योजनायें काफी हैं लेकिन हितग्राहियों को लाभ प्राप्त नहीं होते हैं. देश में बच्चों द्वारा संगठित तौर पर बाल अपराध कराये जाते हैं और माफिया सक्रिय हैं जो बच्चों से भीख मगाते हैं लेकिन कोई नियम कायदे नहीं की इनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाए. उन्होंने यह भी बताया और खेद जाहिर किया की हमारे कार्यकाल के दौरान 5 वर्ष में कोई भी शिकायतें और अपीलें नहीं आयीं जिससे बाल अधिकार संरक्षण की दिशा में कोई बड़ा प्रयास उभर कर सामने आये. उन्होंने कहा की कागजों पर इतने पुनर्वास और पोषण आदि गृह खुले हुए हैं लेकिन वास्तविक मौके पर सब निष्क्रिय हैं. यह सब चिंता का विषय है इस दिशा में आरटीआई कार्यकर्ताओं को भी आगे आकर काम करने की जरुरत है.

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   कार्यक्रम के अंत में प्रश्न उत्तर लिए गए जिसमे लोगों ने विभिन्न प्रकार के अपने संदेह रखे जिसका उपस्थित सूचना आयुक्तों, चाइल्ड राइट्स एक्सपर्ट्स और फोरम फॉर फ़ास्ट जस्टिस के ट्रस्टी प्रवीण पटेल ने भी समाधान किया. कार्यक्रम के अंत में अभी हाल ही में आरटीआई कार्यकर्ता देवेन्द्र अग्रवाल पर हुए हमले को लेकर भी चर्चाएँ हुईं जिसमे सबने चिंता जाहिर की और आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट लाने पर बल दिया. आत्मदीप ने जल्द ही एक सामूहिक पत्र छत्तीसगढ़ सरकार को भेजने के लिए कहा

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