MP/Rewa// आरटीआई वेबीनार में ही उठा मनरेगा भ्रष्टाचार का मामला

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लोकपाल ने कहा जलजांच होगी// सूचना आयुक्त ने कहा गंभीर है विषय, उधर वेबीनार में ही मजदूरों ने दिए अपने बयान//आरटीआई लोकायुक्त और लोकपाल विषय पर आयोजित हुआ 27वां वेबीनार// सूचना आयुक्त राहुल सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुआ कार्यक्रम// पेपर फाइलिंग बंद कर इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग की व्यवस्था स्थापित की जाए – शैलेश गांधी

आरटीआई वेबीनार में ही उठा मनरेगा भ्रष्टाचार का मामला, लोकपाल ने कहा जांच होगी//

सूचना आयुक्त ने कहा गंभीर है विषय वेबीनार में ही मजदूरों ने दिए अपने बयान//

आरटीआई लोकायुक्त और लोकपाल विषय पर आयोजित हुआ 27वां वेबीनार//

सूचना आयुक्त राहुल सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुआ कार्यक्रम//

पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेष गांधी रहे विशिष्ट अतिथि//

लोकपाल मनरेगा देवेंद्र द्विवेदी एवं बीवी श्रीवास्तव ने कार्यक्रम में रखे अपने विचार//

लोकपाल मनरेगा ने कहा शक्तियां तो बहुत पर सुविधा का अभाव जिसके कारण नहीं हो पा रही कार्यवाही//

पेपर फाइलिंग बंद कर इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग की व्यवस्था स्थापित की जाए – शैलेश गांधी//

पीडीएस, मनरेगा, मजदूर और किसान से जुड़े मामलों पर नो टॉलरेंस – सूचना आयुक्त राहुल सिंह//

आरटीआई मे लोकायुक्त और लोकपाल मनरेगा विषय पर 27 वें ज़ूम मीटिंग वेबीनार का आयोजन किया गया। प्रत्येक रविवार सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक आयोजित होने वाले वेबीनार की अध्यक्षता मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, मनरेगा लोकपाल रीवा मध्य प्रदेश देवेंद्र द्विवेदी, बीबी श्रीवास्तव सम्मिलित हुए। पूरे देश से 50 से अधिक आरटीआई कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, सूचना के अधिकार में रुचि रखने वाले सोसाइटी से जुड़े हुए गणमान्य नागरिकों ने हिस्सा लिया और अपने अपने अनुभव साझा किए। देश के कोने कोने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से आरटीआई कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। 

   कार्यक्रम का संचालन एवं प्रबंधन का कार्य एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता नित्यानंद मिश्रा, शिवेंद्र मिश्रा के द्वारा किया गया।

पीडीएस, मनरेगा, मजदूर और किसान से जुड़े मामलों पर नो टॉलरेंस – सूचना आयुक्त राहुल सिंह

इस बीच कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि देश में कानून बहुत है और सभी कागजों पर ही चल रहे हैं। आज आवश्यकता है उस कानून को वास्तविक धरातल पर इंप्लीमेंट कर प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने की। अपने कार्यों और मध्य प्रदेश सूचना आयोग में दिए जा रहे धारा 4 के तहत ताबड़तोड़ आदेशों के विषय में उन्होंने बताया कि जो कानून पहले से विद्यमान है हम उन्हीं को आगे बढ़ा रहे हैं नया कुछ नहीं कर रहे हैं। और हर प्रशासनिक पद पर बैठे हुए अधिकारी को अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन करना चाहिए जिससे देश में अकाउंटेबिलिटी ट्रांसपेरेंसी और जवाबदेही बढ़े। पारदर्शिता का सिद्धांत आरटीआई के लिए सर्वोपरि है और यही हमारा मूल मंत्र है। जो कर्मचारी अथवा अधिकारी अपनी ड्यूटी का निर्वहन न करें उनके ऊपर सिविल सेवा अधिनियम के तहत कार्यवाही की जानी चाहिए तभी व्यवस्था में सुधार होगा। देखा जाय तो पूरे देश में ही कई विभागों में स्टाफ की कमी है लेकिन हम अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते और हमें अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। हमारे पास भी स्टाफ की कमी है पर वॉलिंटियर्स की मदद से सूचना आयोग के निर्णय आ रहे हैं।

मजदूर किसान और गरीब की समस्या के विषय में राहुल सिंह ने कहा कि इन मामलों में जीरो टॉलरेंस व्यवस्था रहनी चाहिए। यदि किसी गरीब का पेट मारा जा रहा है उसकी मजदूरी नहीं दी जा रही है अथवा बीपीएल कैटेगरी और खाद्यान्न पाने वाले गरीबों और किसानों का शोषण हो रहा है तो उसमें त्वरित और तत्काल कार्यवाही की जानी चाहिए तभी व्यवस्थाएं सुधर पाएगी। राहुल सिंह ने कहा कि सिस्टम को काम करना पड़ेगा क्योंकि जहां एक तरफ भ्रष्टाचार बढ़ रहा है ऐसे में उस पर अंकुश लगाने वाली संस्थाओं को कार्य करना पड़ेगा। पुष्पराज तिवारी के लोकपाल मनरेगा के मामले का उदाहरण देते हुए सूचना आयुक्त ने बताया कि पुष्पराज तिवारी जैसे लोगों को आगे आना चाहिए और मजदूरों के हक की लड़ाई लड़नी चाहिए और संपूर्ण समाज को ऐसे कार्यकर्ताओं की मदद करनी चाहिए। कोई एक ऐसी पंचायत आदर्श व्यवस्था के तौर पर स्थापित की जानी चाहिए जहां पर सब कुछ ठीक हो रहा हो उसके लिए पुष्पराज तिवारी जैसे आरटीआई कार्यकर्ता समय की मांग है।

पेपर फाइलिंग बंद कर इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग की व्यवस्था स्थापित की जाए – शैलेश गांधी

भारत के सूचना आयोग के इतिहास में शैलेश गांधी एकमात्र ऐसे सूचना आयुक्त थे जिन्होंने अपने कार्यालय में पेपरलेस व्यवस्था बनाकर केंद्रीय सूचना आयोग में इतिहास रचा था। अपने साढ़े 4 वर्ष के कार्यकाल में 20 हज़ार से अधिक प्रकरणों का निपटारा कर यह दिखा दिया कि आयोग को कैसे कार्य करना चाहिए। अपनी बात रखते हुए रविवार 27 दिसंबर के वेबीनार में श्री गांधी ने कहा कि अब समय आ गया है कि ज्यादा से ज्यादा जानकारी धारा 4 के तहत साझा की जाए और वेब पोर्टल पर रखी जाए जिससे कार्यालयों में आरटीआई लगाने की आवश्यकता ही न पड़े और सीधे जानकारी किसी भी आवेदक को मात्र एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाए इससे पेपर फाइल करने, आरटीआई आवेदन लगाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। कार्यालयों में व्यवस्था के लिए शैलेश गांधी ने कहा की आज इलेक्ट्रॉनिक युग में पेपर फाइल सिस्टम बंद किया जाए और इलेक्ट्रॉनिक फाइल सिस्टम प्रारंभ किया जाए। बैंकिंग सिस्टम का उदाहरण देते हुए शैलेश गांधी ने बताया कि आज से 20 वर्ष पहले ही बैंकों में पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत व्यवस्था लागू कर दी गई है तो वही व्यवस्था आखिर सरकार पूरे देश में क्यों नहीं लागू करती है? श्री गांधी ने कहा कि इस विषय में मेरा सुझाव है कि सबको मिलकर प्रयास करना चाहिए और हजारों करोड़ रुपए की जनता के टैक्स के पैसे की बचत की जानी चाहिए जो मात्र बेवजह पेपर ऑफिस के वर्क में खर्च हो रहे हैं।

वेबीनार में ही मजदूरों ने लोकपाल मनरेगा को घेरा, लोकपाल ने कहा मामले की जांच होगी

इस बीच 27 दिसंबर को सुबह 11:00 से 1:00 के बीच में आयोजित जूम वेबीनार में आमंत्रित किए गए रीवा जिले से लोकपाल मनरेगा देवेंद्र द्विवेदी एवं बीबी श्रीवास्तव ने अपने कार्यालय की व्यावहारिक समस्या बताना प्रारंभ किया तो वहीं वेबीनार में जुड़े हुए मजदूरों ने उन्हें आड़े हाथों ले लिया और बताया कि 10 वर्ष से उनकी शिकायत का कोई समाधान लोकपाल मनरेगा अथवा किसी भी जिम्मेदार कार्यालय द्वारा नहीं किया जा रहा है और मजदूरों को न तो आज तक मनरेगा की मजदूरी मिली है और न ही उनके साथ न्याय किया गया है। हिनौती पंचायत एवं डाढ़ पंचायत के सैकड़ों मजदूरों ने कहा कि उन्होंने चार-पांच वर्ष पहले कार्य किया था लेकिन आज तक मनरेगा की मजदूरी उन्हें नहीं मिली है जबकि इसकी शिकायत कई बार की जा चुकी है। त्योंथर ब्लॉक रीवा के पुष्पराज तिवारी ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की सीडी बनाकर जांच के लिए लोकपाल मनरेगा और सीईओ जिला पंचायत को दी है लेकिन न तो कोई जांच हुई और न ही कार्यवाही हो रही है। मात्र अधिकारियों के द्वारा डेट बताई जा रही है, इस पर लोकपाल मनरेगा ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और जल्दी ही निराकरण किया जाएगा। वहीं सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि यह काफी गंभीर मामले हैं और इस पर प्रशासन और लोकपाल मनरेगा को उचित कार्यवाही करना चाहिए।

बिहार का उदाहरण देते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि बिहार सरकार में लोकपाल मनरेगा के आदेश सार्वजनिक किए जाते हैं और यहां तक की गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए जाते हैं तो आखिर वही व्यवस्था मध्यप्रदेश में क्यों नहीं लागू हो सकती? 
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राहुल सिंह ने मप्र की 23922 पंचायतों के मजदूरों को दी सौगात, दे दिया यह आदेश

ज्ञातव्य हो कि अभी हाल ही में राहुल सिंह ने मध्य प्रदेश की 23922 पंचायतों में कार्यरत मनरेगा के मजदूरों के लिए एक सौगात दी है जिसमें पुष्पराज तिवारी बनाम लोकपाल मनरेगा मामले में मजदूरों की शिकायत की जानकारी धारा 4 के तहत स्पष्ट लिंक देकर वेबपोर्टल में साझा किए जाने के निर्देश प्रिंसिपल सेक्रेट्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मध्यप्रदेश शासन को दिए गए हैं और 3 माह का समय दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि यदि 3 माह के भीतर कार्यवाही नहीं होती है तो प्रिंसिपल सेक्रेटरी पंचायत विभाग पर जुर्माने की कार्यवाही की जाएगी जिससे पूरे पंचायत विभाग में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह है कि राहुल सिंह के इस आदेश के बाद लोकपाल मनरेगा और पंचायत विभाग के क्रियाकलापों में क्या कुछ परिवर्तन आ पाता है। बहरहाल जूम मीटिंग के दौरान ही सैकड़ों मजदूरों ने लोकपाल मनरेगा की कार्यप्रणाली पर जमकर आरोप लगाए और कहा कि यहां किसी भी शिकायत का कोई निराकरण नहीं होता है जबकि सरकार ने स्पेशल लोकपाल मनरेगा का गठन मात्र मजदूरों की सुरक्षा के लिए किया था लेकिन न तो उनके अधिकारों की सुरक्षा हो पा रही है और न ही उन्हें मजदूरी दी जा रही है जबकि दिन प्रतिदिन उनका शोषण बढ़ता जा रहा है।


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