Bhopal MP Khulasa // मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखी अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय की आधारशि‍ला।

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विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन

अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय

Bhopal MP Khulasa // भारत के हृदय स्थल, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 6 जून 2013 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी एवं मध्य प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय की आधारशि‍ला रखी। यह विश्वविद्यालय तकनीकी, चिकित्सा, कला , वाणिज्य और पत्रकारिता एवं जनसंचार से जुड़े विषयों की शिक्षा प्रदान करता है।

विश्वविद्द्यालय में प्रतिदिन पत्रकारिता एवं जनसंचार की कक्षाएं ऑनलाइन संचालित की जा रही है !

विश्‍वविद्यालय अपने स्वयं के नवनिर्मित भवन मुगलिया कोट, सूखी सेवनिया में स्थापित हो चुका है। विश्‍वविद्यालय के प्रशासनिक भवन एवं अकादमिक भवन का लोकार्पण हो चुका है। अध्ययन, अध्यापन, प्रबंधन सहित सभी गतिविधियां नवीन भावन से ही संचालित हो रहीं है। विश्‍वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापना की गई।विश्‍वविद्यालय के प्रांगण में भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाएं स्थापित हो गई है। अनावरण होना शेष है।महिला एवं पुरुष छात्रावास निर्माण हो चुका है। लोकार्पण किया जाना शेष है।

मातृभाषा हिंदी के माध्यम से ज्ञान विज्ञान की दिशा में भारतीय ज्ञान परम्परा और प्राच्य विज्ञान का अध्ययन,अध्यापन और अनुशंधान को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। यह प्रमाणित सत्य है कि विश्व के स्थापित विकसित राष्ट्रों ने ज्ञान,विज्ञान,तकनीकी,अनुसंधान के क्षेत्रों में जो विकास किया है वह उन राष्ट्रों ने अपनी अपनी मातृभाषा में ही किया है। इतना ही नहीं जो विकासशील राष्ट्र विकसित राष्ट्रों की श्रेणियों में अवस्थापित हो रहे है उन्होंने ने भी अपनी शिक्षा दीक्षा और अनुसंधान स्वयं की मातृभाषा में ही किया है उदाहरण स्वरूप चीन,जापान,कोरिया,इजराइल इत्यादि। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 में भी मातृभाषा में शिक्षा पर जोर दिया गया है। प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के निवास भी निर्माणाधीन है। आगामी 5-6 माह में तैयार हो जाएंगे।अभी तक विभिन्न परंपरागत पाठ्यक्रमों में कुल विद्यार्थियों की संख्या मात्र 60 थी। जिसमें अकादमिक सत्र 2019-20 में 500-600 छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई हैं। वर्तमान सत्र में UGC तथा MHRD द्वारा निर्दिष्ट मूक्स, स्टार्टअप, स्वयं के विभिन्न अध्ययन केन्द्रों में रोजगारोन्मुखी के 28 पाठ्यक्रम संचालित किए हैं। अकादमिक सत्र 2020-21 में छात्र संख्या 480 से बढ़कर 3700 के लगभग हो गई है। अकादमिक सत्र 2021-22 में कुछ नवीन पाठ्यक्रमों जैसे :

 (i) खेल में चोट निदान प्रबंधन

 (ii) आधारभूत स्वास्थ्य संरक्षण आदि संचलित होना प्रस्तावित है।

यह पाठ्यक्रम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य केंद्रों पर सहयोगी के रूप में सेवाएं दे सकते हैं। विश्‍वास है कि छात्र संख्या अकादमिक सत्र 2021-22 में छात्रों की अभिरुचियों को तथा रोजगारोन्मुखी उपादेयता को देखते हुए छात्र संख्या लगभग 7000 से 8000 तक होने की संभावना है। विश्‍वविद्यालय को रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों से कुल ₹ 62593200 (छः करोड़ पच्चीस लाख तेरानवे हजार दो सौ मात्र ) की धन राशि शुल्क के रूप में प्राप्त हुई है। शासन द्वारा जो अभी तक 3 करोड़ 70 लाख राशि के लगभग अनुदान प्राप्त होता है। विश्‍वविद्यालय स्वयं के आर्थिक श्रोत सृजित कर रहा है। आत्मनिर्भर विश्‍वविद्यालय कार्य योजना के अंतर्गत विशेषतः योग, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा, प्राथमिक चिकित्सा उपचार, खेल में चोट निदान प्रबंधन, आधारभूत स्वास्थ्य संरक्षण, मशरूम उत्पादन तकनीकि एवं प्रबंधन, जैविक कृषि एवं प्रौद्योगिकी प्रबंधन, सायबर कानून, आहारिकी एवं जनस्वास्थ्य पोषण, होटल मैनेजमेंट एंड टूरिज्म, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग इत्यादि के पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। विश्‍वविद्यालय द्वारा भारत की परंपरागत कला, कौशल के संरक्षण और विकास के लिए अध्ययन केंद्रों में कौशल विकास की योजनाओं को मूर्तरूप दिया जा रहा है। जिसमें रीवा के सुपारी से बने भगवान की मूर्तियाँ और झाऊआ गुड़ियां, श्योपुर के लकड़ी के बने खिलौने, उपकरण आदि। इनका निर्माण, प्रबंधन और बाजार उपलब्‍ध करना शामिल है। विश्‍वविद्यालय में शासन के अनुरूप निर्धारित समय सीमा में अकादमिक कैलेंडर अर्थात अध्ययन अध्यापन, परीक्षा, परिमाण आ रहे हैं। राज भवन में आयोजित बैठक में राज्य शासन द्वारा विश्‍वविद्यालय को केंद्रीय विश्‍वविद्यालय बनाए जाने का प्रस्ताव एवं आग्रह किया है। बैठक में माननीय राज्यपाल, माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री, माननीय मुख्यमंत्री, माननीय उच्च शिक्षा मंत्री, UGC के सचिव, मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव, राज्यपाल के प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और विश्वविद्यालय के कुलपति उपस्थिति रहे। विश्‍वविद्यालय को केंद्रीय विश्‍वविद्यालय बनाए जाने के प्रस्ताव, संकल्प केंद्र में विचाराधीन एवं अंतिम स्थित में है। माननीय केंद्रीय उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ से भी अनेक बार चर्चा हुई है।

विश्‍वविद्यालय में अटल व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत प्रति वर्ष व्याख्यान का आयोजन। विविध समसामयिक विषयों पर 300 से अधिक संगोष्ठियों, सम्मेलनों एवं कार्यशालाओं का समय-समय पर आयोजन।

        विश्‍व हिंदी सम्मेलन, मॉरीशस में विश्‍वविद्यालय ने प्रतिनिधित्व किया। विश्‍वविद्यालय ने 5 गांव गोद लिए हैं वहाँ पर सेवा कार्य करते रहते हैं। विद्यार्थियों और बच्चों को उच्च शिक्षा अध्ययन के लिए प्रेरित करने हेतु कार्यक्रमों का संचालन करना। कोविड काल में 5000 मास्क और सेनिटाइजर वितरित किए गए।

विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग से विश्‍वविद्यालय ने 2-एफ की मान्यता प्राप्त की। अभियांत्रिकी में हिंदी भाषा में लिखी लगभग 700 पुस्तकें AICTE द्वारा प्राप्त की और अनेकों पुस्तकों का अनुवाद कार्य किया है।

विश्‍वविद्यालय की पत्रिका अटल संवाद एवं अटल वार्ता का नियमित प्रकाशन जिसमें विश्‍वविद्यालय की अकादमिक, सांस्कृतिक एवं समाज कार्य से जुड़ी हुई गतिविधियों के आयोजनों के प्रतिवेदनों का प्रकाशन !
होता है। कोरोना संक्रमण के कारण व्यक्ति में उत्‍पन्‍न भय और मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए विश्‍वविद्यालय के योग विभाग एवं आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में नित्य नि:शुल्क योग, आसन, ध्यान और स्वाध्याय प्रातः 6:30 से 8:00 बजे तक कराया जाता है। लोग मानसिक संत्रास से निवृत्ति पा रहे हैं। विश्‍वविद्यालय के पूर्व एवं वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों के द्वारा कोरोना से संक्रमित रोगियों को ऑनलाइन से योगा सतत कराया जा रहा है जिससे रोगियों के स्वस्थ एवं मनोबल में काफ़ी सुधार हुआ है।

विश्‍वविद्यालय द्वारा अस्पतालों में जाकर टी.बी. के मरीजों को फल एवं डॉ. द्वारा निर्धारित दवाइयों का वितरण किया जाता है। स्‍वच्‍छता अभियान कार्यक्रम निरन्तरता के साथ संचालित है। ग्राम चीचली और शहर के ही बावडि़या कला में स्कूल में जाकर सफाई अभियान किया जाना और सफाई के लिए प्रोत्साहित किया जाना।

विश्वविद्यालय का प्रशासनिक एवं  अकादमिक आरम्भ मिंटो हॉल,पुरानी विधानसभा से आरम्भ हुआ। जब वहां मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा निर्माण कार्य आरम्भ हुआ तो, विश्वविद्यालय भोज मुक्त विश्वविद्यालय में संचालित हुआ और फिर श्याम प्रसाद मुखर्जी (बेनजीर) महाविद्यालय, कोलार, के भवन में संचालित हुआ। अब विश्वविद्यालय अपने स्वयं के नव निर्मित भवन में संचालित हो रहा है।

विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. रामदेव भरद्वाज जी के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय शिक्षा के जगत में नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं।

ऐसे कार्य जो पूर्ण होने की प्रक्रिया में है:

(I)    विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा विश्‍वविद्यालय को 12-B की मान्यता प्राप्त करने के लिए प्रयास करना जो विचाराधीन है।

(II)    विश्‍वविद्यालय को केंद्रीय विश्‍वविद्यालय का दर्जा दिए जाने एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए मूर्तरूप दिलाने के लिए गति प्रदान करना।इस दिशा में बहुत कुछ हो चुका है।

(III)   विश्‍वविद्यालय परिसर में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी एवं स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का लोकार्पण होना है। मूर्तियां लग गई है।

(IV) विश्‍वविद्यालय में एक महिला छात्रावास एवं दो पुरूष छात्रावास तैयार हो गए है इनका लोकार्पण होना शेष है।

(V)   प्राध्यापकों के निवास भवन निर्माणधीन है, उन्हें गति प्रदान करनी है।

(VI) दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकास योजना के अंतर्गत उद्यमिता एवं स्वास्थ्य से जुड़े हुए पाठ्यक्रमों को मूर्तरूप देना।

(VII) पंचकर्म तकनीशियन एवं प्राकृतिक चिकित्सा की प्रयोगशाला को आरंभ करना।

(VIII) पानी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए एक तलाब का निर्माण करना एवं ऊर्जा संरक्षण के लिए सौर्य ऊर्जा यंत्र स्थापित करना।

(IX) परिसर में सघन वृक्षारोपण किया जाना जिसमें पीपल, बरगद, नीम, आम, आंवला के वृक्षों का रोपण किया जाना है।

(X)   एक प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित करना तथा नि:शुल्क योग प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करना।

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(XI) शिक्षक संवर्ग की नियुक्ति के लिए कार्यवाही प्रारंभ हो चुकी है और जल्दी ही नियुक्ति हो जायेगी।

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