रीवा में किसानों की धान लूट मामले में हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस// 6 हफ्तों में प्रिंसिपल सेक्रेटरी, कलेक्टर, एसपी, संभागायुक्त से मांगा जबाब

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3 जून 2020 को जिला रीवा अंतर्गत त्योंथर तहसील में मागी क्रमांक 3 धान खरीदी केंद्र में लगभग 375 किसानों की 20 हज़ार क्विंटल से अधिक धान जिसकी कीमत तीन करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है उसकी सुनियोजित ढंग से लूट करवा दी गई थी। जिस पर किसानों ने एसडीएम, जिला कलेक्टर, संभाग आयुक्त, खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग सभी को अवगत करवाया और कार्यवाही की गुहार लगाई लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई इसके उपरांत थक हार कर किसानों ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी की अगुवाई में 72 हलफनामा के साथ हाईकोर्ट अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा के द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर की गई थी।
मामले की सुनवाई पर दिनांक 18 दिसंबर 2020 को उच्च न्यायालय जबलपुर के न्यायाधीश संजय द्विवेदी के द्वारा संबंधित प्रिंसिपल सेक्रेटरी फ़ूड विभाग, फूड कंट्रोलर रीवा, एसपी रीवा, कलेक्टर रीवा सहित लगभग आधा दर्जन अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए 6 सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।

क्या कहना है सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी का?
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मामले में प्रारंभ से ही किसानों के साथ न्याय के लिए लड़ रहे एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने बताया कि 3 जून 2020 को मागी क्रमांक 3 धान खरीदी केंद्र में किसानों की धान लूट बताकर बंदरबांट कर बेंच दिया गया जिसमें समिति प्रबंधक, सहकारिता विभाग, खाद्य विभाग सभी की मिलीभगत सामने आई है। शिकायत के बाद जांच में लीपापोती की गई है और दोषियों को क्लीन चिट देने का प्रयास किया गया जिसके बाद मामले को जिला कलेक्टर, एसपी रीवा, संभागायुक्त, एसडीएम को अवगत कराते हुए कार्यवाही की मांग की गई थी। जब कार्यवाही नियमानुसार नहीं हुई तब 72 किसानों ने प्रति किसान 100 रुपये नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर में नोटराइज्ड हलफनामा प्रस्तुत कर हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका दायर की थी।
अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा इस मामले में वकील नियुक्त किए गए थे जिन्होंने जनहित के मामले को देखते हुए बहुत ही अल्प फीस में मामले में अपनी भूमिका अदा की है। अब हाईकोर्ट जबलपुर के द्वारा इन आधा दर्जन वरिष्ठ अधिकारियों को 6 सप्ताह का समय देकर जवाब तलब किया गया है। ऐसे में मामले में बेहतर कार्यवाही की उम्मीद की जा रही है। एक्टिविस्ट द्विवेदी का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और किसान के खून पसीने के एक-एक दाने का हिसाब लिया जाएगा और निश्चित तौर पर किसानों की धान का बंदरबांट करने वाले समिति प्रबंधक सहकारिता के अधिकारी और फूड विभाग सभी को जबाब देना पड़ेगा।


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