MP/REWA//एक्टिविस्ट शिवानंद के ऊपर हुए हमले को लेकर एसोशिएशन ऑफ RTI एक्टिविस्ट का पत्र जारी

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एसोशिएशन ऑफ RTI एक्टिविस्ट द्वारा राष्ट्रपति राज्यपाल, सहित प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र जारी

रीवा जिले के RTI एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के ऊपर हुआ जानलेवा हमला देश प्रदेश में इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। एक्टिविस्ट के ऊपर हुए हमले को लेकर पत्रकार सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ताओं के साथ साथ देश भर की जनता में आक्रोश व्याप्त होने से यह हमला नित नए मोड़ लेता नज़र आ रहा है। बता दें कि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी पर किए गए कायराना हमला को लेकर सरपंच एवं उसके गुर्गो द्वारा किए गए हमला की चारों तरफ आलोचना और गिरफ्तारी के की मांग की जा रही है। इसी तारतम्य में आरटीआई एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष श्री संतोष घोगरे ने देश के राष्ट्रपति, मध्यप्रदेश के राज्यपाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, के साथ साथ मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग को पत्र लिखकर जल्द कार्यवाही की मांग करते हुए ऐसे कानून व्यवस्था बनाने की बात कही है जिसमें आरटीआई कार्यकर्ताओं व उनके परिवार को सुरक्षा, बीमा, के साथ इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। आपने अपने पत्र में यह भी कहा है कि शिवानंद द्विवेदी द्वारा मध्यप्रदेश में 300 करोड़ का घोटाला भी हाल ही में उजागर किया गया जिसके चलते यह हमला नियोजित योजनावद्ध तरीके से दिनदहाड़े किया गया है। आरटीआई कार्यकर्ता अपने जान की परवाह न करते हुए जनहित व देशहित में कार्य करते हैं और भ्रष्टाचार का उजागर करके देश प्रदेश के राजस्व को भी बढ़ाते हैं। अपनी मांगों को रखते हुए संतोष घोगरे ने कहा कि प्रतिदिन आरटीआई को हथियार मानकर समाज व देश प्रदेश के हित में कार्य करने वाले आरटीआई एक्टिविस्टों की हत्या हो रही है इसके बावजूद भी सरकार सन्नाटा लिए हुए हैं।

हैशटैग मैं भी शिवानंद कैम्पेनिंग के साथ गिरफ्तारी की मांग

सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफार्म पर देखा जाए तो इन दिनों मैं भी शिवानंद के साथ सरपंच को गिरफ्तार करो हैश टैग कैम्पेनिंग के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा सहित जिम्मेदारों से कार्यवाही करने की अपील की जा रही है लेकिन इसके बाबजूद भी अभी तक किसी तरह की कार्यवाही नहीं की गई।

पुलिस ने हमले को धमकी में बदला

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एक्टिविस्ट सहित पत्रकार जब मनगवां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने जाते हैं तब थाने में हमलावर के नाम पुलिस द्वारा सिर्फ आवेदन लिया जाता है औऱ बाद में जांच का हवाला दे कर ठंडे बास्ते में छोड़ दिया जाता है। यह जानकारी सोशल मीडिया में पहुँचते ही पुलिस अधीक्षक रीवा सहित सभी जिम्मेदारों को लोग टैग करके आलोचना करने लगते हैं।और आयोग द्वारा जब हस्तक्षेप होता है तब मनगवां थाने में खाना पूर्ति के नाम पर सामान्य धाराओं में हमलावर के नाम पर रिपोर्ट दर्ज कर ली जाती है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर रीवा का पुलिस विभाग ऐसे अपराधियों का संरक्षण कर रहा है.? जब एक्टिविस्ट के ऊपर हुए हमला को धमकी में क्यों बदल दिया गया है। हलांकि देश भर के सामाजिक कार्यकर्ता व सामाजिक संगठन अब अपने अपने पत्र जारी कर न्याय दिलाने व उच्चस्तरीय जांच के साथ शिवानंद के संरक्षण हेतु अपनी आवाज़ उठा रहे हैं।

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