रीवा//किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी अकाल की – उमाशंकर त्रिपाठी

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 जिस प्रकार से पिछले 2 वर्षों से देश में प्रकृति अपना विकराल रूप करो ना जैसे वैश्विक महामारी के रूप में दिखा रही है उससे भी भयंकर प्रकृति लगता है कि दिखाने जा रही है फिर से भयंकर अकाल की परछाई नजर आने लगी है जुलाई माह आधा माह बीत गया बोनी का समय करीब करीब समाप्त होने की कगार पर है किसान के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी बरसात अपना रंग दिखा दिया बोनी प्रभावित हो गई जो भी किसान धान की नर्सरी डाले थे उनकी नर्सरी एक माह से ऊपर हो गई वह भी खराब हो रही है पानी नहीं गिर रहा किसान के लिए बहुत ही कठिन दौर का समय आ गया है देश की प्रदेश की सरकार किसानों की चिंता को समझने में नाकाम है किसान पूरी तरह से फसल पर आधारित है बरसात ना होने से कुछ किसान जिनके पास सिंचाई का साधन सुविधा हाय सरकार के नीति के चलते बिजली के न मिलने के कारण उनकी भी फसल की बुवाई रोपाई नहीं हो पाई बिजली इस समय आधा घंटा से ऊपर स्थाई रूप में किसी भी दिन नहीं रहती अगर किसान के किसानी प्रभावित हो गई तो देश की पूरी अर्थव्यवस्था बिगड़ जाएगी सरकार को प्रशासनिक अमला को तत्काल किसानों के हित के लिए किसानों की चिंता को दूर करने के लिए किसानों की फसल के लिए आवश्यक पहल करने की आवश्यकता है जिन किसानों के पास पानी की सुविधा होते हुए भी बिजली की समस्या के चलते खेती नहीं कर पा रहे हैं कुछ किसान जो अन्य किसी साधन से सिंचाई तो कर लेते हैं किंतु आवारा पशुओं के चलते फसल प्रभावित हो रही है ऐसे समस्त किसानों की समस्याओं के लिए सरकार को प्रशासनिक अमला को सामने आना चाहिए अभी अगर किसान खेती नहीं कर पाएगा तो किसानों के साथ-साथ ग्रामीण स्तर के मजदूरों को भी रोजी-रोटी की समस्या पैदा हो जाएगी मेरा सरकार से प्रशासनिक अधिकारियों से विनम्र आग्रह है कि तत्काल ऐसी कोई योजना तैयार की जाए जिससे आम जनता को रोजी-रोटी की समस्या पैदा ना हो पाए साथ ही आवारा पशुओं पर तत्काल प्रतिबंध लगाए जाने की आवश्यकता है शासन द्वारा जो योजनाएं प्रशासनिक अम्लों के हित के लिए होती है उनमें अनावश्यक रूप से  प्रचार किया जाता है एवं शासन की खजाने से अनावश्यक रूप से राशि व्यय की जाती है किंतु जिस कार्य से क्षेत्र की 80% आबादी का हित होना है उसे नजरअंदाज कर जनता के भरोसे छोड़ दिया जाता है यह उचित नहीं है करोड़ों रुपए खर्च करके गौशाला का निर्माण कराके सिर्फ कागजों में पशुओं का रखरखाव दिखाया जा रहा हूं इन गौशाला निर्माण से कोई हित नहीं हो रहा है हजारों हजार की झुंड में मवेशी किसानों के लिए अभिशाप बनकर फसल नष्ट कर किसानों को भुखमरी की कगार पर ला दिए हैं गौशालाओं का रखरखाव का कार्य ऐसे लोगों के हाथ में दिया गया है जो कभी भी अपने घर में एक भी मवेशी नहीं रखते सिर्फ गौशाला के रखरखाव के नाम पर शासन की राशि का दुरुपयोग कर बंदरबांट किए जाने का खेल जारी है किसान दिन प्रतिदिन मवेशियों के द्वारा नष्ट की जा रही फसल से परेशान हैं इस पर तत्काल सरकार को प्रशासनिक अधिकारियों को  कार्यवाही करनी चाहिए साथ ही राजस्व विभाग से संबंधित अधिकारियों से जिसमें तहसीलदार एसबीएम माननीय कलेक्टर महोदय से विनम्र अपील है कि किसानों के लिए पैदा हुए इस भीषण अकाल की संकट में सरकार को अपनी रिपोर्ट भेज कर किसानों के लिए मजदूरों के लिए पैकेज की घोषणा करें।

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