MP KHULASA//बाल विवाह पर मीडिया के साथ ऑनलाइन जागरूकता अभियान

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यूनिसेफ के साथ एसजेएमसी छात्र एवं मीडियाकर्मियों की कार्यशाला

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इंदौर। भारतीय समाज में बाल विवाह, बालश्रम, को रोकने एवं बच्चों के संरक्षण के लिए यूनिसेफ द्वारा पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के साथ ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यशाला में इंदौर धार झाबुआ एवं विंध्य प्रदेश के साथ प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से मीडियाकर्मी व पत्रकारिता के छात्र उपस्थित रहे।
यूनिसेफ मध्यप्रदेश संचार प्रमुख अनिल गुलाटी ने बताया कि, आयोजित कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण था जिसे मीडिया के माध्यम से जिला एवं तहसील स्तर पर कार्यरत पत्रकारों को इस अभियान से जोड़ना था। वहीं कार्यक्रम के शुरुआत में पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनाली नरगुंदे ने बताया कि, बाल अधिकार, बालहिंसा और बाल विवाह के खिलाफ मीडिया ने सकारात्मक भूमिका निभाई है। इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए हम कोशिश करेंगे कि बाल विवाह ना हो बचपन में शादी करना और बच्चों से काम कराना पूर्णत: गैरकानूनी है जो बाल अधिकारों का उल्लंघन करता है। ऑनलाइन कार्यशाला में यूनिसेफ की बाल संरक्षण अधिकारी अद्वैत मराठे ने कई उदाहरण के साथ फ़िल्म और प्रजेंटेशन के माध्यम से अपनी बात को छात्रों एवं मीडियाकर्मियों के माध्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि, बाल अधिकार और मानव अधिकार दो अलग-अलग विषय हैं, लेकिन बाल अधिकारों को संरक्षण करने के लिए हम सबकी जिम्मेदारी है। बच्चा जब जन्म लेता है तब वह जो समझता है उसी तरह से कम्युनिकेशन करता है। बाल अधिकारों को लेकर कुल 54 अधिकार प्राप्त हैं जिनमें से चार जीवन जीने का अधिकार, विकास का अधिकार, संरक्षण का अधिकार और भागीदारी का अधिकार मूल मने गए हैं। लेकिन हम अक्सर देखते हैं कि बच्चे के लिए माता-पिता अपने हिसाब से कपड़े से लेकर शिक्षा तक राय बनाते हैं औऱ अपनी मर्जी से कार्य करते हैं। लेकिन भागीदारी के अधिकार के तहत कोई राय बच्चों से नहीं ली जाती है। बाल संरक्षण को लेकर बताया गया कि, सरकार के कई संस्थान चाइल्ड के लिए बने हैं। लेकिन शारीरिक मानसिक भावना को ठेस ना पहुंचे इस बात पर ध्यान देने की आज सबसे ज़्यादा जरूरत है। बाल संरक्षण के खतरे को फिल्म के माध्यम से भी दिखाया गया जिसमें गरीबी, बेरोजगारी, औऱ भेदभाव के कारण बच्चे कई स्कूल नहीं जा पाते औऱ वह बाल श्रम के लिए मजबूर हो जाते हैं। आंकड़े के मुताबिक सात हजार से भी ज्यादा बच्चे बाल श्रम से जुड़े हुए हैं। वहीं भारत में सबसे ज्यादा बच्चे मध्य प्रदेश से गुम हुए हैं। 32.9 प्रतिशत बाल विवाह हुए हैं और अगर देखा जाए तो 50 से ज्यादा क्राइम प्रतिदिन होते हैं जो पुलिस के पास पहुँचते हैं। लेकिन कुछ क्राइम ऐसे भी हैं जिनको हम नहीं गिनते हैं। प्रदेश में 10 से ज्यादा लड़कियां प्रतिदिन रेप की शिकार होती हैं 27 शादियां हाल ही में रोकी गई हैं। ऑनलाइन हिंसा भी लॉकडाउन के दौरान काफी बढ़ी है। हलांकि 1920 में बाल विवाह का कानून आया था लेकिन अभी तक क्रियान्वयन नहीं हो पाया, सामाजिक-आर्थिक कारण, दहेज प्रथा कानून और सरकारी योजना के बारे में अभाव और आठवीं के बाद पढ़ाई के लिए नहीं भेजना समाज में बाल श्रम और बाल विवाह का सबसे बड़ा कारण है। जिसके दोषी समाज से लेकर बैंड बाजा, कार्ड छापने वाले से लेकर विवाह की रश्म में शामिल होने वाले हर व्यक्ति होते हैं।

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