Indore MP Khulasa//12 दिनों में मौत का तांडव:इंदौर के 5 मुक्तिधामों में 1001 चिताएं जलीं, हर तीसरा शव कोरोना संक्रमित का; कर्मचारी बोले-नहीं देखा कभी ऐसा मंजर!

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इंदौर के श्मशान घाटों पर लोगों को अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

कोरोना की भयावह स्थिति का अंदाजा श्मशान घाटों में जलती चिताओं से लगाया जा सकता है। इंदौर शहर के अस्पतालों में ही नहीं, बल्कि मुक्तिधामों में भी वेटिंग चल रही है। कोरोना से जंग हारे लोगों के शवों की अंत्येष्टि करने के लिए मुक्तिधाम पर भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। 51 मुक्तिधाम-कब्रिस्तानों वाले इंदौर के पांच प्रमुख मुक्तिधामों में अप्रैल के 12 दिनों मेें 1001 शवों का अंतिम संस्कार किया गया है। इनमें से 319 शव कोरोना संक्रमितों के थे यानी हर तीसरा शव संक्रमित का था।

सोमवार रात तक शहर में आधिकारिक रूप से कोरोना संक्रमण के कारण अब तक 1011 लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन यह सरकारी आंकड़े है। इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सच्चाई तो श्मशानों में हर दिन आने वाले शवों की संख्या से लगाया जा सकता है। भास्कर के संवाददाता ने जब सयाजी मुक्तिधाम का जायजा लिया तो उस समय 28 शव तो चिताओं पर जल रहे थे। इसमें से 4 शव कोरोना मृतकों के थे। शवों के आने का सिलसिला जारी था। यहां पर तैनात कर्मचारियों का कहना है कि कुछ महीने में ही एक हजार के ऊपर अस्थि कलश संभाल कर रखे हुए हैं। धार्मिक रिवाजों के अनुसार 3 दिन बाद अस्थियों को लेने परिजन आते हैं, लेकिन रोजाना इतने शव आ रहे हैं कि इन्हें संभालना मुश्किल हो रहा है।

सयाजी मुक्तिधाम में एक साथ 28 चिताएं जल रही थीं। एक साथ कैमरे में कैद नहीं हो पाईं।

कोविड प्रोटोकॉल से रोज हो रहे औसत 20 अंतिम संस्कार

निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, साल 2020 में शहर में 19,170 मौतें हुईं, जबकि वर्ष 2019 में मौतों का आंकड़ा 16,250 ही था। यानी 2020 में 2920 मौतें ज्यादा हुईं। इधर, जनवरी से मार्च 2021 के बीच 5 प्रमुख मुक्तिधाम में 2420 अंतिम संस्कार हुए। शहर में 51 मुक्तिधाम, कब्रिस्तान है। प्रशासन ने निगम व मुक्तिधाम से आंकड़े जारी करने पर पाबंदी लगा रखी है। सेवादारों के अनुसार रोज औसतन 20 अंत्येष्टियां कोविड प्रोटोकॉल से हाे रही हैं, जबकि रिकॉर्ड में सिर्फ 3 से 5 मौतें दर्शाई जा रही हैं।

मुक्तिधामों के कर्मचारी परेशान

मुक्तिधाम में तैनात कर्मचारी इनका हिसाब रखते-रखते परेशान हैं। मार्च के मुकाबले अब अप्रैल के महज 12 दिनों में ही अधिक संख्या में शव मुक्तिधाम पहुंचे हैं। इनमें बड़ी संख्या उनकी है जिनका किसी न किसी अस्पताल में कोरोना का इलाज चल रहा था। इसके बावजूद ये मौतें स्वास्थ्य विभाग द्वारा रोजाना देर रात जारी किए जाने वाले मेडिकल बुलेटिन में शामिल नहीं हैं।

अस्थियों को भी संभालना हो रहा मुश्किल

मुक्तिधाम के कर्मचारी भी मानते हैं कि पिछले 12 दिनों से शवों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है। जिससे अस्पताल सहित मुक्तिधाम में भी लंबी कतार लग रही है। मुक्तिधाम के कर्मचारी खुद शव दाह करने पहुंच रहे लोगों से जल्द अस्थियों को ले जाने का आग्रह कर रहे हैं। ताकि दूसरे शव जलाने के बाद उनकी अस्थियां रखने के लिए जगह मिल सके। शहर के तमाम मुक्तिधाम में जगह को लेकर टोटा है। टीनशेड की बजाए नीचे शव दाह करने पड़ रहे है।

मुक्तिधाम में अस्थियों को भी संभाल कर रखा गया है

इंदौर में जल रही हैं दूसरे जिलों की चिताएं

कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार का आंकड़ा इसलिए बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है, क्योंकि यहां पर अधिकांश खरगोन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी, धार, झाबुआ, धामनोद, बड़वानी के लोग अपने परिजनों की पार्थिव देह को लेकर आते हैं। यहीं पर अंतिम संस्कार करवा कर घर लौट जाते हैं। इसी प्रकार मेघदूत (सयाजी) मुक्तिधाम में भी देवास, भोपाल, शाजापुर, सेंधवा, रतलाम सहित अन्य बाहर के जिलों में रहने वाले लोग अंतिम संस्कार के लिए आते हैं।

लोकेंद्र सोलंकी, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम इंदौर

रिपोर्ट निगेटिव है तो कोविड में गिनती कैसे कर सकते हैं

जो मौतें सामने आ रही है, उनमें से अधिकांश की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है लेकिन लंग्स इंफेक्शन या अन्य किसी कारण से मौत होती है तो उसे कोविड कैसे मान सकते हैं। फिर भी हम नजर रखे हुए हैं, ताकि किसी तरह का भ्रम न हो।

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डॉ. अमित मालाकार, कोविड नोडल अधिकारी, इंदौर

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