Umariya (M.P.)//Nowrozabad// पर्यावरण दिवस मनाने का अनूठा तरीका, देवरी के ग्रामीणों का प्रकृति प्रेम सराहनीय

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नौरोजाबाद 11 जून – आज हम बात करेंगे नौरोजाबाद तहसील अंतर्गत आने वाले एक गांव, ग्राम – देवरी की जहां रहने वाले लोग भी प्रकृर्ति के प्रति अपने कर्तव्यो को भली भांति समझते हैं।
आज हम जिस माहौल में है और जिसने भी कोरोना महामारी के रौद्र रूप के करीब से दीदार किए, उन्हें जिंदगी का असल मूल्य तो समझ आ ही गया। साथ ही लोगो को जिंदा रहने के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राणवायु हमे वृक्षो से मिलती है यह भी लोगो ने जान लिया है।
इसिलए इस बार सभी ने पर्यावरण दिवस को एक त्योहार की तरह मनाया। गांवों में लोगों की दिनचर्या ही लगभग पर्यावरण की सेवा के साथ ही होती है, लोग तरह-तरह के पेड़-पौधे अपने घरों में लगाने के सौकीन होते ही हैं।

कुछ वर्ष पहले गांव के समाजसेवी जो निरंतर गांव के विकास के बारे में सोंचते हैं और उन्होंने जिस पीपल के पौधे को रोपा था आज वही भार पूरा वृक्ष बन गया है।
आज उसी पेेेड़ को सहारा देने वाले कुछ प्रकृर्ति प्रेमियो की बात करेंगे, जिन्होंने सरकारी स्कूल में लगे पीपल के वृक्ष को ,अपने खर्चे से ट्रकों से मिट्टी मंगाकर 4 फ़ीट से ज्यादा मिट्टी से भरकर चबूतरा बनाया।


जब हमने उनसे पूछा क्या ये कार्य ग्राम पंचायत करवा रही है तो बताया नही , हमने कब से सोंच रखा था ये काम हमे करना है। और आज हम कर भी रहे है।

कानाफुन्सी कहती है:-

गांव के लोगो ने बताया कि कुछ महीने पहले पंचायत की तरफ़ से इसी पीपल के चारो ओर चबूतरा बनाने के लिए हामी भरी गई थी। यहां तक खबर है, की चबूतरा बनाने के लिए रखी ईंटो को भी यहां से पंचायत द्वारा उठवा लिया गया।


जब हमने फोटो लेंनी चाही तो तीनों प्रकृति प्रेमी सुदामा कुशवाहा,अशोक द्विवेदी(दद्दन)और फूलचंद कैमरे के सामने आने से बचते रहे फिर , ये कहने पर की आपने अच्छा काम किया लोगों को भी आपके बारे में जानना चाहिए, तब जाकर उन्होंने सहमति जताई।

बाएं सुदामा कुशवाहा, मध्य में अशोक द्विवेदी एवं दायें फूलचंद कुशवाहा
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आज इस दौर में हर भारतवासी को वृक्ष लगाने चाहिए और दूसरे जरूरी कामो की तरह उन वृक्षो की देखभाल करके पालन करना अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए, क्योंकि हम जिस भयावह कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं। उससे लड़ने लिए दवा के साथ जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है वो है ऑक्सीजन जो हमे पेड़-पौधों से ही प्राप्त होती है।

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