Bhopal MP Khulasa//जेपी में मरीज की मौत का मामला:लोगों ने शव सड़क पर रख निष्पक्ष जांच की मांग के साथ डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की!

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चुनाभट्‌टी के कोलार तिराहे पर

जयप्रकाश जिला चिकित्सालय में कथित डॉक्टरों की लापरवाही से हुई तख्त सिंह की मौत के मामला बढ़ता ही जा रहा है। शनिवार को दुर्व्यवहार का आरोप लगाने के बाद डॉक्टर के इस्तीफे के बाद रविवार सुबह 10.30 बजे लोगों ने शव सड़क पर रखकर आवाजाही बंद कर दी। हालांकि एंबुलेंस को आने-जाने दे रहे है। लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। दोषी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता और नौकरी सरकार उपलब्ध कराएं।

रविवार सुबह 10.30 बजे कोलार तिराहा कोलार गेट हाउस चुनाभट्‌टी में श्व को सड़क पर रख कर बंद कर दी गई। यहां पर बड़ी संख्या में लोग सड़क पर बैठे गए। सड़क को वाहनों और लड़की रखकर बंद कर दिया गया। दूसरी तरफ लॉकडाउन होने के बावजूद भीम नगर इलाके से बड़ी संख्या में लोग घरों के बाहर निकल कर सड़क किनारे खड़े हो गए। करीब 20 मिनट तक मौके पर सिर्फ एक पुलिस कर्मी ही पहुंचा था। काफी देर बाद कुछ और पुलिस कर्मी मौके पर आए और परिजनों को समझाने लगे। परिजनों ने उनकी एक बात भी सुनने से मना कर दिया। मृतक के रिश्तेदार राजकुमार ने कहा कि तख्त सिंह की डॉक्टरों की लापरवाही से मौत हुई है। डॉक्टरों ने दूसरी जगह ले जाने का दबाव बनाकर ऑक्सीजन का मास्क हटा दिया था। जिसके कारण मौत हुई। हमारी मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो। साथ ही मृतक के तीन छोटे छोटे बच्चे है। परिवार को सरकार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएं और बच्चों के पालन-पोषण के लिए एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दें।

क्या है मामला

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भीम नगर निवासी 40 वर्षीय तख्त सिंह को परिजन सांस लेने में दिक्कत होने पर जयप्रकाश अस्पताल लेकर गए थे। तख्त सिंह की कोरोना रिपोर्ट भी नेगिटिव आई थी। शनिवार दोपहर 12.30 बजे अस्पताल पहुंचने पर मरीज को डॉक्टरों ने भर्ती कर लिया था। दो घंटे बाद मरीज की मौत हो गई थी। परिजनों ने डॉक्टरों पर आक्सीजन का मास्क हटाने से मौत का आरोप लगाया था। वहीं, वहीं, जेपी अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर योगेन्द्र श्रीवास्तव ने परिजनों के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा था कि उन्होंने मरीज को भर्ती किया था। दो घंटे तक वह खुद इमरजेंसी में मरीज को देखते रहे। उसका ऑक्सीजन सेचुरेशन 30 था। फिर भी हमने उसको बचाने के लिए पूरा प्रयास किया। मरीज की स्थिति को देखते हुए परिजनों को दूसरी जगह नहीं भेजने के बारे में भी बता दिया था। इस बीच दो घंटे बाद उसकी मौत हो गई थी। जिसके बाद अस्पताल पहुंचे कुछ लोगों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और गाली गलौज की।

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