Khulasa एक्सप्लेनर – UP के ‘रहस्यमयी बुखार’ से MP के वायरल फीवर तक! देश के कई राज्यों में क्यों बीमार हो रहे बच्चे ? जानें इसके लक्षण से बचाव तक के उपाय !

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देश के कई राज्यों में वायरल फीवर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। UP-बिहार और मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में डेंगू और वायरल फीवर के मामले तेजी से आ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि मरीजों में बच्चे ज्यादा हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में रोजाना सैकड़ों लोग वायरल फीवर की शिकायतों के बाद अस्पताल आ रहे हैं।

अस्पताल आ रहे ज्यादातर मरीजों में डेंगू और वायरल फीवर स्क्रब टाइफस और लेप्टोस्पायरोसिस के मामले देखे जा रहे हैं। ये अलग-अलग तरह के फीवर हैं, जो बैक्टीरिया और वायरस की वजह से फैल रहे हैं।

समझते हैं, ये बीमारियां हैं क्या? इनके लक्षण क्या हैं? कैसे फैलती हैं? कैसे आप खुद को इन बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं? इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए हमने डॉक्टर विजय नाथ मिश्रा से बात की है। डॉक्टर मिश्रा न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर हैं और बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में चिकित्सा अधीक्षक रह चुके हैं।

डेंगू क्या है?

डेंगू मच्छर से फैलने वाला वायरल इन्फेक्शन है। एडीज मच्छर के काटने से डेंगू होता है। डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते निकल आते हैं।

डेंगू होता कैसे है?

हालांकि, ये वायरस 10 दिन से अधिक समय तक जीवित नहीं रहता है। डेंगू से निपटने के लिए कोई खास इलाज उपलब्ध नहीं है। सिर्फ इसके लक्षणों को पहचान कर ही आप इस पर काबू पा सकते हैं। आमतौर पर डेंगू का मच्छर शाम के समय पैरों पर काटता है।

कैसे करें पहचान?

बुखार आने के साथ-साथ बदन में दर्द होने लगे और ब्लड में प्लेटलेट्स की संख्या कम होने लगे तो ये डेंगू के लक्षण हैं। डेंगू में काफी तेज बदन दर्द होता है।

UP में जो रहस्यमयी बुखार फैलने की बात कही जा रही थी वो क्या है?

UP में सबसे पहले रहस्यमयी बुखार से बच्चों की मौत के मामले फिरोजाबाद में आए थे। जांच के बाद पता चला ये भी वायरल फीवर ही था। इनमें से ज्यादातर केस डेंगू के थे। UP में वायरल फीवर के मामले कई शहरों में आ चुके हैं। इनमें डेंगू के साथ लेप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस के भी मामले हैं।

लेप्टोस्पायरोसिस फीवर क्या है?

लेप्टोस्पायरोसिस बैक्टीरियल फीवर है, जो हमारे आसपास रह रहे जानवरों की वजह से फैलता है। यह बीमारी इंसानों के साथ-साथ जानवरों को भी संक्रमित करती है। साथ ही ये उन इलाकों में ज्यादा फैलता है जहां जल जमाव होता है। बरसात के मौसम में जगह-जगह पानी भर जाता है, इस वजह से बरसात में ये बीमारी ज्यादा फैलती है।

बीमारी की वजह लेप्टोस्पायरा नामक एक बैक्टीरिया होता है। आमतौर पर यह फीवर चूहे, गिलहरी, भैंस, घोड़े, भेड़, बकरी, सुअर और कुत्ते द्वारा फैलता है।

कितना खतरनाक है लेप्टोस्पायरोसिस?

शरीर में प्रवेश करने के बाद ये धीरे-धीरे किडनी, लीवर, हार्ट को भी निशाना बनाता है। इलाज नहीं होने पर लेप्टोस्पायरोसिस किडनी को भी डैमेज कर सकता है। मरीज का लीवर काम करना बंद कर सकता है, सांस लेने में परेशानी होने लगती है। गंभीर स्थिति में मरीज की मौत भी हो सकती है। इसका इलाज भी एंटीबायोटिक से ही किया जाता है।

लेप्टोस्पायरोसिस की पहचान कैसे करें?

पेशाब में जलन, पेट में दर्द, पीलिया के लक्षणों के साथ बुखार आना लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण हैं

स्क्रब टाइफस क्या है?

स्क्रब टाइफस भी बैक्टीरियल फीवर है जो जापान, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया, चीन, तिब्बत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत में ज्यादातर फैलता है। ये ओरिएंटा सुसुगामुशी नामक बैक्टीरिया की वजह से फैलता है जो माइट्स के काटने से शरीर में प्रवेश करता है।

कितना खतरनाक है ये बुखार?

साफ-सफाई की कमी के कारण सुसुगामुशी बैक्टीरिया पैदा होता है। इसके इलाज के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। एंटीबायोटिक के जरिए ही इसका इलाज किया जाता है। अगर इसे जल्दी डाइग्नोज कर इलाज न किया जाए तो 60% मामलों में 14वें दिन मरीज की मौत हो जाती है।

इसका इलाज क्या है?

सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, स्क्रब टाइफस के इलाज के लिए एंटीबायोटिक डॉक्सीसाइक्लिन दी जाती है। डॉक्सीसाइक्लिन का उपयोग किसी भी उम्र के मरीज में किया जा सकता है। जिन लोगों का डॉक्सीसाइक्लिन के साथ जल्दी इलाज किया जाता है, वे आमतौर पर जल्दी ठीक हो जाते हैं।

इसकी पहचान कैसे करें?

स्क्रब टाइफस का माइट्स जहां काटता है, वहां दर्द भरा काले रंग का अल्सर बन जाता है। आमतौर पर ये पैरों पर घुटने के नीचे ही काटता है। कीड़े के काटने के बाद आपको बुखार आएगा।

इन बीमारियों से बचने के लिए क्या सावधानी जरूरी है?

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बेंगलुरू के एस्टर हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक स्पेशलिस्ट डॉक्टर सुजाता त्यागराजन के मुताबिक,

  • वायरल फीवर से बचने के लिए भी कोरोना की तरह ही सेफ्टी प्रोटोकॉल्स का पालन करें। बच्चों को सार्वजनिक स्थानों पर न ले जाएं। साफ-सफाई रखें और हाथ-धोते रहें।
  • खाने में लिक्विड डाइट को बढ़ाएं। जंक फूड को अवॉइड करें। हरी सब्जियां खाएं। एंटीऑक्सीडेंट और प्रोटीन से भरपूर फूड लें।
  • पर्याप्त मात्रा में नींद लें। 3 से ज्यादा दिन तेज बुखार होने पर डॉक्टर को दिखाएं।
  • सबसे जरूरी सफाई है। अपने घर को साफ-सुथरा रखें, ताकि मच्छर और कीड़े पनप ही न पाएं।
  • घर के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें और न ही इकट्ठे हुए पानी में जाएं।
  • कपड़े ऐसे पहनें जो आपके शरीर को पूरी तरह ढंक लें। पैरों को ढंकने के लिए मोजे और हाथों के लिए पूरी आस्तीन के टीशर्ट, शर्ट पहनें।

किस राज्य में कैसे हैं हालात?

  • मध्यप्रदेश के भोपाल और ग्वालियर में सबसे ज्यादा केस आ रहे हैं। भोपाल के अलग-अलग अस्पतालों में 300 से भी ज्यादा बच्चे भर्ती हैं। मंगलवार को ही 865 बच्चे बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल लाए गए। इन बच्चों में वायरल इन्फेक्शन, निमोनिया, डायरिया, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण हैं। इसी तरह ग्वालियर, मंदसौर, सागर, सतना, रतलाम में भी रोजाना सैकड़ों बच्चे वायरल फीवर की शिकायतों के बाद अस्पताल लाए जा रहे हैं।
  • उत्तर प्रदेश की हालत सबसे ज्यादा खराब है। प्रयागराज में 170 से ज्यादा बच्चों को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। यहां स्थिति ये है कि एक बेड पर 2-2 बच्चों का एक साथ इलाज किया जा रहा है। लखनऊ, फिरोजाबाद, मथुरा, एटा, इटावा, सीतापुर, बाराबंकी, कासगंज और फर्रुखाबाद समेत उत्तर प्रदेश के 14 जिलों में बुखार के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब तक 100 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं।
  • बिहार के मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, सिवान, गोपालगंज और चंपारण में बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हो रहे हैं। राजधानी पटना के सभी बड़े अस्पतालों में चिल्ड्रन वार्ड में 80% तक बेड फुल हैं। मुजफ्फरपुर जिले में भी वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। अलग-अलग अस्पतालों में पिछले एक हफ्ते में 200 से भी ज्यादा बच्चे बुखार की शिकायतों के साथ इलाज के लिए लाए गए हैं। 4 बच्चों की मौत भी हुई है।
  • दिल्ली में डेंगू के 125 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। 2018 के बाद ये सबसे ज्यादा हैं। 2018 में 137 मामले सामने आए थे। दिल्ली के साथ ही नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अस्पतालों में भी बुखार के मरीजों की संख्या में अचानक तेजी आई है। बुखार के ज्यादा मामले बच्चों में देखे जा रहे हैं।

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