Khulasa Jharkhand//झारखंड का गौरव जिनके नाम से, उनके परिजन बदहाल क्यों?

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झारखंड का गौरव जिनके नाम से, उनके परिजन बदहाल क्यों?

बिरसा मुंडा की 121 वी शहादत दिवस है

आदिवासियों के भगवान बिरसा मुंडा को इंसाफ चाहिए:पड़पोती काे 3 बार आवेदन के बाद भी नहीं मिली छात्रवृत्ति, पड़पोते को आश्वासन के 12 साल बाद भी प्रमोशन नहीं।झारखंड में रांची के खूंटी बाजार टांड़ के पास पड़पोती जौनी कुमारी मुंडा सब्जी बेचती है। कालेज में पढ़ती है।

सब्जी बेच रही बिरसा की पड़पोती कहती हैं – शर्म आती है बताने में कि मैं कौन हूं!!

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खूंटी बाजारटांड़ के पास आम, जामुन, रूगड़ा, कटहल, साग आदि बेच रहीं महिलाओं-युवतियों में एक जौनी कुमारी भी हैं, जो कच्चे कटहल का कोवा बेच रही हैं। जौनी भगवान बिरसा मुंडा की पड़पौत्री हैं। सड़क के उस पार ही उसका कॉलेज है, जहां से वह स्नातक पार्ट-3 की पढ़ाई कर रही हैं। उसका ऑनर्स मुंडारी भाषा है, जिसमें पढ़कर वह गांव और अन्य बच्चों को शिक्षित करना चाहती है। पिछली परीक्षा सेमेस्टर-3 में उसने 73.2 प्रतिशत नंबर लाए थे। कॉलेज में 3 बार छात्रवृत्ति के लिए आवेदन भरे, लेकिन कभी उसे छात्रवृत्ति नहीं मिली।

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