छतरपुर कलेक्टर अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही करना चाहते हैं तो सबसे पहले शासकीय जमीनों को बेचने एवं खरीदने वालों के खिलाफ कार्यवाही करें।

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छतरपुर जिलेभर के राजस्व अधिकारी की मिलीभगत से भूमाफियाओं ने राजस्व को लगाया करोड़ों चूना।

करोड़ों रुपए की शासकीय जमीनों को कौड़ी के भाव में राजस्व अधिकारियों ने बेचा।

छतरपुर कलेक्टर अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही करना चाहते हैं तो सबसे पहले शासकीय जमीनों को बेचने एवं खरीदने वालों के खिलाफ कार्यवाही करें।

छतरपुर। छतरपुर शहर में कई शासकीय जमीनों को कौडिय़ों के भाव में बड़े भू माफियों के नाम कर दिया गया है। बगौता ग्राम का नक्शा गायब होने के कारण इसका भरपूर लाभ राजस्व अधिकारियों ने उठाया और कई खसरों को खुर्दबुर्द कर शासकीय जमीनों को प्रायवेट नामों पर दर्ज कर दिया गया है।

क्या है मामला विस्तार से समदे…..

ऐसा ही एक मामला पन्ना रोड से सटई रोड पर बन रहे एक शॉपिग काम्पलेक्स का सामने आया है। यह शासकीय जमीन थी और इसका वर्ष 1984 में आवासीय पट्टा दिया गया था। जिसका भू भाटक 802 रुपए वार्षिक निर्धारित किया गया था। तत्कालीन कलेक्टर होशियार सिंह के द्वारा यह आवासीय पट्टा दिया गया था। इसके बाद जिसे पट्टा दिया गया था वह व्यक्ति इस दुनिया में नहीं रहा। उसके बाद वर्ष 2003 में तत्कालीन कलेक्टर रामानंद शुक्ल द्वारा आवेदक को आवासीय भूमि से व्यवसायिक भूमि में परिवर्तन करने की अनुमति दी थी जब उसका प्रिमियम 29 लाख 32308 रुपए निर्धारित किया गया था तथा वार्षिक भू भाटक 2 लाख 4113 रुपए 67 पैसे निर्धारित की थी। संबंधित जन ने यह राशि जमा नहीं कराई।

छतरपुर के तत्कालीन एसडीएम डीपी द्विवेदी ने एसडीएम के पद के साथ नजूल का भी प्रभार मे कई सरकारी जमीने आवंटित की गई।

इसके बाद यह जमीन वर्ष 2013, 14,15,16 में वापस मप्र के नाम दर्ज हो गई। फिर आवेदक ने चतुराई से पुन: इस पट्टा के लिए आवेदन दिया और छतरपुर के तत्कालीन एसडीएम डीपी द्विवेदी ने एसडीएम के पद के साथ नजूल का भी प्रभार लिए हुए थे तब उन्होंने यह जमीन 13 लाख 69 हजार 350 रुपए में एक मुस्त राशि जमा कर आवेदक के नाम आवंटित कर दी। तथा इस आदेश में उन्होंने भविष्य में कोई भी भू राजस्व देय नहीं होना भी उल्लेख किया। मजेदार बात ये है कि बगौता के खसरा नंबर 1688/2 में यह जो जमीन दी गई थी वह मप्र शासन होने के बाद फिर वर्ष 2016 में लीज कैसे प्राप्त हुई। जबकि शासन से पट्टा व लीज देने का प्रावधान खत्म हो चुका था। यही नहीं तत्कालीन एसडीएम ने इस शासकीय जमीन की रजिस्ट्री भी दि नांक 26.03.2016 को संबंधित जन के नाम करा दी है।

राजस्व अधिकारियों ने सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाया गया फिर भी सब गोल माल।

सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाया गया है जिसकी रिकवरी तत्कालीन एसडीएम डीपी द्विवेदी से वसूल की जाना चाहिए। इस संबंध की शिकायत प्रदेश के मुख्य सचिव एवं कमिश्रर सागर से शिकायतकर्ता ने की है। शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि डीपी द्विवेदी से जो शासन की क्षति हुई है उसकी वसूली की जाए और आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471/ 34 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। गौरतलब हो कि मप्र के मुखिया शिवराज सिंह जहां भू माफियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर शासन के राजस्व अधिकारी शासन को चूना लगाकर शासकीय जमीनों के कौड़ी के भाव में बेच रहे हैं।

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यह खुलासा एक शिकायतकर्ता के द्वारा की गई शिकायत से उजागर हुआ है। यदि जिला कलेक्टर वास्तविकता में अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही करना चाहते हैं तो सबसे पहले शासकीय जमीनों को बेचने एवं खरीदने वालों के खिलाफ कार्यवाही करें। अन्यथा गरीब गुरबों के खिलाफ कार्यवाही करने से परहेज करें।

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