Guna MP Khulasa//जानें, माननीयों ने कहाँ खर्च किये टैक्स के पैसे:विधायकों की सबसे ज्यादा रूचि यात्री प्रतीक्षालय और विद्युत डीपी बनवाने में; शिक्षा पर किसी विधायक ने खर्च नहीं किया पैसे; अकेले अस्पताल में 4 प्रतीक्षालय!

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गुना। अपने क्षेत्र विकास के लिए विधायकों को हर साल 185 लाख की विधायक निधि दी जाती है, लेकिन इस निधि का सबसे ज्यादा उपयोग बस स्टैंड बनाने में हुआ है। गुना विधायक गोपीलाल जाटव ने तो 12 महीने के लिए मिली इस निधि से 176 लाख रुपए केवल यात्री प्रतीक्षालय के लिए ही मंजूर किए हैं। सबसे कम राशि राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह ने 67 लाख रुपए मंजूर की है। इनमें से 20 लाख तो केवल कोरोना रोकथाम के लिए मंजूर किए।

हद तो यह है कि हनुमान चैराहा से अंबेडकर भवन के बीच सिटी बस के 4 बस स्टाॅप पहले से बने हुए थे। इन्हीं के पास विधायक ने 6 लाख रुपए से दो और नए बनवा दिए हैं। जर्जर इमारतों में चल रहे जिला अस्पताल में 12 लाख रुपए से बस स्टाॅप बनेंगे। यात्री प्रतीक्षालय बनवाने का काम एमपी एग्रो द्वारा देखा जा रहा है। कोरोना काल में सबसे ज्यादा इलाज पर खर्च केवल बमोरी विधायक एवं मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने खर्च किए हैं। राघौगढ़ विधायक जयवर्धन और चांचैड़ा विधायक लक्ष्मण सिंह की अनुशंसा पर गौर करें तो इनकी रुचि डीपी देने में सबसे ज्यादा है। चारों विधायकों ने महज 5 महीने में 5 करोड़ 45 लाख रुपए खर्च कर दिए हैं। इनके पास मात्र 1 करोड़ 95 लाख रुपए की राशि बची है।

यात्री प्रतीक्षालय के नाम लग रही राशि ठिकाने
शहर से लेकर गांवों में लोग सड़क, पानी, स्कूल भवन आदि की समस्या को लेकर जूझ रहे हैं। लेकिन हमारे माननीयों ने इन समस्याओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। इस साल गुना के विधायकों को जो राषि मिली है, उनमें से अधिकांष राशि यात्री प्रतीक्षालयों के नाम जारी की गई है। प्रतीक्षायल 3 से साढ़े चार लाख रुपए में तैयार हो रहा है। लेकिन इस राशि से छोटा सा प्रतीक्षालय तैयार होता है और उस पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। शहर में इनकी गुणवत्ता देखी जाए, तो यात्री प्रतीक्षालय के नाम पर जनता के पैसे की बंदरबांट नजर आती है।

कोरोना काल में खर्च करने में पीछे रहे माननीय
कोरोना काल में मार्च से लेकर मई के बीच सबसे ज्यादा भयाभय हालात थे। पुलिस, सफाई कर्मचारी और डाक्टर नर्सिंग स्टाफ पीपीई किट, माॅस्क, सैनिटाइजर आदि की समस्या से जूझ रहा था। लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही थी। कई लोग ऑक्सीजन खरीद तक नहीं पाए थे। ऐसे में सबसे पहले राघौगढ़ विधायक जयर्वधन सिंह ने 20 लाख रुपए मंजूर किए। सबसे ज्यादा 1 करोड़ 16 लाख रुपए स्वास्थ्य के लिए मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने मंजूर किए। हालांकि इनमें से 60 लाख का एक प्रोजेक्ट की राषि वापस हो सकती है। चांचैड़ा विधायक लक्ष्मण सिंह ने 12.65 लाख रुपए एम्बुलेंस के लिए दिए हैं। इस राशि के अलावा दूसरी राषि कोरोना रोकने के लिए नहीं दी गई।

जाने किस विधायक ने कहां-कहा दी है राशि
गोपीलाल जाटवः वित्तीय वर्ष 2021-22 में विधायक निधि से 185 लाख मिले हैं। 48 यात्री प्रतीक्षालयों के लिए 176 लाख रुपए दे दिए हैं। उनके पास 9 लाख रुपए मात्र बचे हैं। उनके द्वारा नपा क्षेत्र में 37 वार्डों में यात्री प्रतीक्षालय बनवाए जा रहे हैं। जहां सिटी बस नहीं चलेगी, वहां भी उनके द्वारा प्रतीक्षालय मंजूर किए हैं। जबकि गुना विधानसभा क्षेत्र कोरोना के बाद बाढ़ से प्रभावित हुआ है। कई जगह रास्ते, पुलियां और भवन गिर गए हैं। 6 महीने के लिए उनके पास 9 लाख की राशि शेष है।

मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया: प्रदेष सरकार में मंत्री हैं। पंचायतों को स्टाम्प मद से 30 करोड़ दिला चुके हैं। उनको विधायक निधि 185 लाख मिली है। इनमें से वे 176 लाख के 38 काम मंजूर कर चुके हैं। यात्री प्रतीक्षालयों से ज्यादा राषि उन्होंन बमोरी में आॅक्सीजन प्लांट के लिए 60 लाख, अस्पताल में कक्ष निर्माण के लिए 24 लाख, फतेहगढ़, विषनवाड़ा, मारकीमहू और म्याना स्वास्थ्य केंद्र के लिए 8-8 लाख मंजूर किए हैं

जयवर्धन सिंहः विधायक निधि को खर्च करने में सबसे पीछे हैं राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह। उन्होंने अभी तक मात्र 67 लाख की मंजूरी दी हैं। इनमें 20 लाख रुपए कोरोना बचाव और 5 लाख की पुलिया को मंजूरी दी गई। उनके द्वारा ट्रांसफार्मर के लिए सबसे ज्यादा राषि खर्च की गई है। राघौगढ़ विधायक डीपी पर खर्च करने में काफी आगे हैं। हालांकि इनके पास भी सवा करोड़ की राषि बची हुई है, जो वे 6 माह उपयोग कर सकते हैं।

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लक्ष्मण सिंहः विधायक निधि में चांचौड़ा विधायक सिंह को भी 185 लाख रुपए मिले हैं। उन्होंने अब तक 126 लाख रुपए की मंजूरी दे दी है। अभी 60 लाख रुपए बचे हुए हैं। चांचैड़ा विधायक ने भी सबसे ज्यादा रुचि ट्रांस फार्मर देने में ली है। उनके द्वारा पूर्व में भी विधायक निधि का उपयोग डीपी लगवाने में ज्यादा खर्च किया गया है। इस क्षेत्र में भी रोड, स्कूल भवन की समस्याएं हैं। हालांकि अभी उनके पास 60 लाख रुपए की राषि बची हुई है।

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