Khulasa Umaria Mp//-रिसोर्ट में बाघ के आराम फरमाने पर वन्यजीव प्रेमियों की व्यापक प्रतिक्रिया

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रिसोर्ट में बाघ के आराम फरमाने पर वन्यजीव प्रेमियों की व्यापक प्रतिक्रिया

संतोष कुमार द्विवेदी

उमरिया । गत दिवस बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के एक रिसोर्ट में बाघ की बाकायदा आराम फरमाते फोटो-वीडियो वायरल होने के बाद वन्यजीव प्रेमियों की व्यापक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं । वन्य जीव प्रेमियों ने बाघों का निजी परिसरों के अंदर जाना-बैठना और बाघों की टेरोटेरी में निजी निर्माण होना दोनों को ही वाइल्डलाइफ के लिए खतरा बताते हुए इस पर गहरी चिंता जाहिर की है । इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है इसने राष्ट्रीय उद्यान बांधवगढ़ में बड़े पैमाने पर पर्यावरण एवं वाइल्ड लाइफ एक्ट की अवहेलना कर निर्मित होटल और रिसॉर्टस के मामले को एक बार फिर से चर्चा में ला दिया है ।


ज्ञात हो कि गत दिवस बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बाघ टी-37 जिसे बमेरा सन के नाम से भी जाना जाता है, ने 5 मई को धमोखर बफर जोन में एक बैल का शिकार करके खाया और समीप ही स्थित समोद सफारी रिसॉर्ट में जाकर एक कॉटेज के बरामदे में बैठकर आराम फरमाने लगा । गनीमत थी उस वक्त रिसोर्ट में उधर कोई कर्मचारी नहीं था, नही तो किसी अनहोनी से भी इंकार नही किया जा सकता था । बाद में रिसॉर्ट की ओर से सूचना मिलने पर बीटीआर के रेस्क्यू दल ने हाथियों के जरिए बाघ जंगल की तरफ धकेल दिया । इस घटना का फोटो – वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद इस पर व्यापक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं । वन्यजीव प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इसे वन्यजीवों के स्वतंत्र विचरण में हस्तक्षेप माना है और शासन – प्रशासन से मांग की है कि बांधवगढ़ में भारी संख्या में गैरकानूनी ढंग से निर्मित होटल्स एवं रिसॉर्ट्स की समुचित जांच आवश्यक है । अधिकार सम्पन्न विशेषज्ञों का एक दल इस बात की जांच करे और देखे कि क्या ये निर्माण नियमानुसार किये गए हैं ?
वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट और एडवोकेट वंदना द्विवेदी का कहना है कि बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के बफर जोन में कोर एरिया से सटकर कई होटल और रिसॉर्ट बने हुए हैं । जो इलाके कभी बाघों के मुक्त विचरण के क्षेत्र थे अब उनमें बड़े-बड़े होटल एवं रिजॉर्ट्स बने बन चुके हैं और वहां पर्यटन व्यापार चल रहा है । यही वजह है कि कई बार बाघ इन निजी परिसरों के अंदर चले जाते हैं, जो उनकी सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है ।
वन्य जीव प्रेमी व पत्रकार आशीष महर्षि का कहना है कि टूरिज्म लावी के ज्यादातर चेहरे सीधे तौर पर राजनीतिक रसूख वाले परिवारों से सम्बद्ध हैं । जो सीधे तौर पर राजनीति से नहीं जुड़े हैं उन्होंने भी अपने अपने राजनीतिक आका पाल रखे हैं, यही वजह है कि उनको राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में काला पीला करने की अनुमति आसानी से मिल जाती है । शासन-प्रशासन सभी को पता है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से लगकर कई गैरकानूनी होटल एवं रिसोर्ट बनाए गए हैं ।

यही नहीं उन्होंने अपने मालिकाना हक से कहीं अधिक जंगल की जमीनें भी दबा रखी हैं । लेकिन इसकी कभी जांच तक नही होती है, कार्यवाही की बात तो दूर है । आपने याद दिलाया कि कुछ साल पहले एक नेता के रिसोर्ट में मृत बाघ पाया गया था । वावजूद इसके उसका कोई बाल बांका नही हुआ ।
ज्ञात हो कि बांधवगढ़ के इतिहास में 11 साल पहले सिर्फ एक बार तत्कालीन कमिश्नर हीरालाल त्रिवेदी ने बांधवगढ़ के होटल एवं रिसॉर्ट्स की वैधानिकता की जांच और उभौतिक सत्यापन कराने के लिए टीम गठित की थी । इस जांच के बाद लगभग 35 होटल्स और रेसोर्ट्स को नोटिस दिया गया था । नोटिस मिलते ही टूरिज्म हल्के में भूचाल ही आ गया और टूरिज्म लॉबी ने आनन-फानन कमिश्नर हीरालाल त्रिवेदी का स्थानांतरण कराकर इस मसले को ठंडे बस्ते में डलवा दिया । लेकिन बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के लिए यह एक बड़ा मुद्दा है और इस तरह की घटनाएं इसे गाहे-बगाहे उजागर करती रहती हैं ।

कथन
“ये सच है कि टी-37 ने मागधी कोर के समीप धमोखर बफर जोन में बैल का शिकार खाने के बाद रिसोर्ट में जाकर बैठा था । यह उसकी टेरोटेरी है । सूचना मिलने पर उसे मगधी कोर एरिया में भेज दिया गया ।”
विंसेंट रहीम
डायरेक्टर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व

“राष्ट्रीय उद्यान ( टाइगर रिजर्व और सेंचुरी ) में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य और व्यावसायिक गतिविधियां एनटीसीए और सरकार की अनुमति के बिना नही की जा सकती । बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के कोर एरिया से सटकर किये गए बड़े बड़े निर्माण कार्य कानूनी रूप से उचित नही हैं । वन्यजीव संरक्षण के रास्ते में ये बड़ी रुकावटें हैं , किंतु पर्यटन लॉबी इतनी ताकतवर है कि इसके विरुद्ध स्थानीय प्रशासन हाथ डालने से कतराता है । वन्य जीव संरक्षण कार्यकर्ताओं की मुहिम और अदालतों के हस्तक्षेप से ही कोई ठोस कार्यवाही सम्भव है ।

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यश कुमार सोनी
वन्य जीव संरक्षण कानून विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षक
उमरिया

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