MP khulasa//सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने फ़ोन और ट्वीट करके आयोग के प्रयासों की दी जानकारी, कहा द्वितीय अपील के लिए बहुत जल्द ऑनलाइन आवेदन फाइलिंग की होगी व्यवस्था

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🔸 सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस के बीच कुछ राहत भरी खबर, मप्र सूचना आयोग में जल्द द्वितीय अपील फाइल करने की होगी ऑनलाइन व्यवस्था//
🔸 ट्वीट कर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने दी जानकारी, कहा आयोग स्तर पर जल्दी ला रहे व्यवस्था//
एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने कहा अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सम्पूर्ण मप्र में ऑनलाइन आरटीआई फाइलिंग की नही होती व्यवस्था//
🔸ट्विटर और सोशल मीडिया में भी प्रारंभ हुआ अभियान, भेजे जायेंगे हजारों ईमेल और पत्र//
यदि जल्दी ऑनलाइन आरटीआई और अपील फाइलिंग की होगी व्यवस्था तो आवेदकों को पीआईओ के चक्कर लगाने से मिलेगी बड़ी राहत//
🔸 पीआईओ द्वारा नही लिए जाते आवेदन और रजिस्ट्री को किया जा रहा वापस, आयोग में इस विषय पर रोज हो रही दर्जनों शिकायतें, आयोग का ज्यादातर समय जानकारी दिलवाने के स्थान पर आवेदन न लेने और पोस्ट वापस करने की शिकायतों के निपटारे को लेकर हो रहा जाया//
🔸 मप्र सहित हरियाणा, झारखण्ड, विहार, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के आरटीआई आवेदकों ने ऑनलाइन आरटीआई फाइलिंग व्यवस्था की उठाई माग//

     मप्र सूचना आयोग में ऑनलाइन आरटीआई फाइलिंग को लेकर जनता का अभियान तेज हो गया है. पिछले 31 अगस्त को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने मुख्यमंत्री मप्र शासन, चीफ सेक्रेटरी मप्र शासन, मुख्य सूचना आयुक्त अरविन्द कुमार शुक्ला एवं मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह को ईमेल कर कोविड दौर में जनता की परेशानी का हवाला देते हुए लिखा था की किस प्रकार आमजन आरटीआई आवेदन फाइल करने के लिए परेशान होते हुए दर-दर भटकते रहे लेकिन कहीं तो आवेदन स्वीकार नहीं किये गए तो कहीं रजिस्टर्ड पोस्ट वापस कर दिए गए. यह हाल न केवल कोविड काल में है बल्कि अभी भी वही स्थिति बनी हुई है. लोक प्राधिकारियों द्वारा आवेदकों को टार्चर किया जाने का सिलसिला निरंतर जारी है. जब कोई आवेदक किसी कार्यालय में जाता है तो उसे आवेदन जमा करने में ही भारी मसक्कत करनी पडती है. सबसे पहले बाबुओं से पाला पड़ता है जो आवेदन लेने और पावती देने में आनाकानी करते हैं. बाबुओं द्वारा बताया जाता है की जाओ साहब से मार्क करवा कर लाओ. लेकिन साहब का या की कोई रता पता नहीं रहता अथवा यदि साहब मिलते भी हैं तो बता देंगे की यह जानकारी उनके कार्यालय में उपलब्ध नहीं है इसलिए आरटीआई आवेदन उनके कार्यालय में नहीं लगेगा. जब आवेदक थक हार कर आवेदन रजिस्टर्ड पोस्ट के माध्यम से भेजता है तो उसे भी वापस कर दिया जाता है. कई बार ऐसे मामले देखने को मिलते हैं की पता सही नहीं है अथवा लोक सूचना अधिकारी उपलब्ध नहीं पाए गए. इस सब समस्याओं का एकमात्र समाधान मात्र ऑनलाइन आर टी आई आवेदन फाइल करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने से ही होगा.


  *ट्विटर और सोशल मीडिया में भी प्रारंभ हुआ अभियान, भेजे जायेंगे हजारों ईमेल और पत्र*

  दिनांक 31 अगस्त को शिवानंद द्विवेदी द्वारा दोपहर 1 बजे के आसपास एक ट्वीट सूचना आयुक्त राहुल सिंह और विजय मनोहर तिवारी को टैग करते हुए किया गया जिसमें उन्होंने लिखा की मप्र सूचना आयोग अब जल्द सम्पूर्ण मप्र में ऑनलाइन आरटीआई आवेदन फाइल करने की यूनिफाइड व्यवस्था सूचना आयोग के वेबपोर्टल में सुनिश्चित करे. ट्रांसपेरेंसी की बातें करना ठीक है लेकिन मप्र सूचना आयोग के प्रयास नाकाफी हैं. उन्होंने आगे लिखा की आखिर ऑनलाइन आरटीआई आवेदन फाइलिंग की व्यवस्था बनाने में आयोग को जो दिक्कत हो उसे पब्लिक में साझा की जाय और कितनी बार स्वयं आयोग मप्र शासन को इस विषय में इंटिमेट किया है वह भी बताएं. कोविड के दौर में जनता परेशान हुई लेकिन आयोग ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया. फिर क्या कहना था ट्वीट, रिट्वीट और रिप्लाई करने का सिलसिला प्रारंभ हो गया. इसके बाद ओपी मिश्रा ने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा की यह बहुप्रतीक्षित प्लेटफार्म था जिसे आयोग जल्द लागू कराये. वहीँ अनिल मिश्रा ने ट्वीट किया की केंद्रीय सूचना आयोग सहित कई राज्यों में ऑनलाइन आरटीआई और अपील फाइल करने की व्यवस्था है लेकिन मप्र में क्यों नहीं जबकि कई मामलों में डिजिटलाइजेसन में मप्र अग्रणी रहा है. वहीं गरोठ इंडिया से गोविन्द ने लिखा की ऑनलाइन व्यवस्था ठीक है क्योंकि इसमें कम से कम एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिल जाता है और लोक सूचना अधिकारी द्वारा आवेदन वापस करने के झंझट और दर्द से छुटकारा मिल जाता है. प्राइवेट स्कूल अभिभावक नामक ट्विटर हैंडल से एक यूजर ने लिखा की हरियाणा सरकार और सूचना आयोग को भी प्रदेश हित में यह कार्य करना चाहिए. हरियाणा सूचना आयोग का सुधार हो जाए और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाए तो बदलाव हो सकता है. रीवा से प्रकाश तिवारी ने भी शिवानंद द्विएव्दी के प्रयासों की सराहना की.


*सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने फ़ोन और ट्वीट करके आयोग के प्रयासों की दी जानकारी, कहा द्वितीय अपील के लिए बहुत जल्द ऑनलाइन आवेदन फाइलिंग की होगी व्यवस्था*

   इस बीच जब ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मप्र सूचना आयोग में ऑनलाइन आरटीआई आवेदन और अपील फाइलिंग की व्यवस्था हेतु युध्य छिड़ा तो मप्र सूचना आयुक्त राहुल सिंह का सन्देश काफी राहत भरा रहा. 01 सितम्बर 2021 को लगभग सवा 4 बजे सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने शिवानंद द्विवेदी के ट्वीट पर रि-ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा की 01 सितम्बर की आयोग में बैठक में नए सॉफ्टवेयर पर चर्चा हुई है और जल्दी आयोग अपने स्तर पर ऑनलाइन आरटीआई की द्वितीय अपील फाइल करने की व्यवस्था बना रहा है. हालाँकि यह व्यवस्था नाकाफी है क्योंकि जहां आयोग में द्वितीय अपील तो ऑनलाइन फाइल की जा सकेगी पर क्या हर विभागों में ऑनलाइन आरटीआई आवेदन और प्रथम अपीलें भी फाइल की जा सकेंगी? यह प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है. राहुल सिंह के इस ट्वीट के बाद कई ट्विटर यूजर ने ट्वीट और रिप्लाई किया जहां कमल दुबे ने पूछा की क्या ऑनलाइन आरटीआई आवेदन भी फाइल किये जा सकेंगे जिस पर श्री सिंह ने बताया की फिलहाल जिस व्यवस्था का डेमोंसट्रेशन किया गया है उसमें मात्र आयोग में द्वितीय अपील फाइल करने की व्यवस्था ही चल रही है. जिसके बाद यूजर डी गोपाल राव ने लिखा की ऑनलाइन आरटीआई फाइल करने का कार्य बड़ा है जिसमे शासन, विभागाध्यक्ष, जिला, संभाग पुलिश एवं इनके निचले स्तर के लोक सूचना अधिकारियों को मैप करना होगा लेकिन उन्हें उम्मीद है की राहुल सिंह के कार्यकाल में आरटीआई ऑनलाइन और प्रथम अपील भी फाइल हो सकेगी. इस पर एक ट्विटर यूजर कमल दुबे ने प्रयासों की सराहना कीवहीं एक अन्य यूजर अरविन्द ने बताया की अन्य राज्यों में तो आरटीआई आवेदन और प्रथम अपील दायर करने की भी ऑनलाइन व्यवस्था है. रीवा से ट्विटर यूजर और आरटीआई वर्कर राघवेन्द्र दुबे सहित दर्जनों लोगों ने शिवानंद द्विवेदी के ही आवेदन को मॉडिफाई कर अपने नाम से सूचना आयोग सहित मप्र के वरिष्ठ कार्यालयों मुख्यमंत्री समेत लेख और ईमेल कर सम्पूर्ण मप्र में ऑनलाइन आरटीआई फाइलिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लिखा है. इन ट्विटर यूजर ने शिवानंद के प्रयासों का समर्थन करते हुए लिखा की मप्र में आरटीआई आवेदक काफी परेशान होते हैं इसलिए ऑनलाइन आरटीआई फाइलिंग की व्यवस्था तत्काल लागू की जानी चाहिए जिस पर आशीष सोनी आदि ने समर्थन किया.

*पिछले दिनों ऑनलाइन आरटीआई फाइलिंग को लेकर यह लिखा था एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने*

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सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने आयोग और मप्र शासन को आड़े हांथों लेते हुए जनता की परेशानियों को नजर अंदाज करने और कोविड के दौर में आरटीआई यूजर का जीवन संकट में डालने का जिम्मेदार बताया था. उन्होंने लिखा की आज जनता यह जानना चाह रही है की आखिर वह क्या समस्या है जिसके चलते मप्र सूचना आयोग में मप्र के सभी विभागों में ऑनलाइन आरटीआई आवेदन फाइल करने की व्यवस्था नहीं हो पायी है. श्री द्विवेदी ने कहा था की वह सूचना आयोग का ध्यानाकर्षण करना चाहते हैं की चूँकि सामाजिक तौर पर वह मप्र के सभी जिलों के कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से जुड़े हुए हैं जो की आरटीआई लगाकर जानकारी प्राप्त करने की उत्सुकता रखते हैं अतः यह चिंता सिर्फ एक व्यक्ति विशेष की नहीं है बल्कि सम्पूर्ण मप्र-वासियों की है जो यह चाह रहे हैं आयोग के माध्यम से मप्र के सभी विभागों में ऑनलाइन आरटीआई फाइल करने और अपील शिकायत करने की यूनिफाइड व्यवस्था लागू की जाए और साथ में यह भी मांग है की जिस प्रकार रीवा संभाग के प्रकरणों में फेसबुक लाइव अथवा ऑडियो/विडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा सुनवाई का अवसर और लाभ प्राप्त हो रहा है वैसे ही सम्पूर्ण मप्र में अविलम्ब लागू की जाय. आखिर जब व्यवस्था ऑनलाइन होगी तो पारदर्शिता ही बढ़ेगी और पूरी उम्मीद है की मप्र राज्य सूचना आयोग पारदर्शी व्यवस्था को ही प्रमोट करने के लिए बैठा है

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