REWA MP KHULASA// हमारा देश कोरोना की दूसरी लहर के लिए तैयार नहीं था – शैलेश गांधी

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कोरोना सिस्टम और पारदर्शिता विषय पर 45 वें राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन//प्यास लगी तो कुंआ खोदने वाली कहावत चरितार्थ हो रही है – सूचना आयुक्त राहुल सिंह // मेडिकल क्षेत्र में सोशल ऑडिट की आवश्यकता वर्तमान समय की माग- भास्कर प्रभु // कर्नाटक में मेडिकल क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी से जानकारी नहीं मिलती – वीरेश बेल्लूर

वर्तमान कोरोना सिस्टम और पारदर्शिता विषय पर 45 वें राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। इस बीच कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के तौर पर मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह, पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, माहिती अधिकार मंच मुम्बई के संयोजक भास्कर प्रभु, वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता वीरेश बेलूर, रीवा संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के मनोवैज्ञानिक डॉक्टर धीरेंद्र मिश्रा सहित पूरे देश से कई गणमान्य नागरिक और आरटीआई विश्लेषक, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता इस आरटीआई पर विशेष कार्यक्रम में सम्मिलित हुए और अपने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने की जबकि कार्यक्रम का संयोजन एवं प्रबंधन का कार्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह एवं छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल ने किया।

🔹 मेडिकल क्षेत्र में पारदर्शिता की बड़ी जरूरत

वर्तमान कोरोना पांडेमिक के मद्देनजर आयोजित 45 वें राष्ट्रीय वेबीनार में मेडिकल क्षेत्र में पारदर्शिता को लेकर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के मनोविज्ञान चिकित्सा विभाग के डॉक्टर धीरेंद्र मिश्रा से प्रारंभ हुई जिन्होंने इस महामारी के दौरान अस्पताल प्रबंधन और मरीजों का किस प्रकार उपचार चल रहा है और क्या व्यवस्था उपलब्ध है, इस विषय पर प्रकाश डालते हुए प्रारंभ की। वर्तमान में ऑक्सीजन की कमी को लेकर जो बातें सामने आ रही थी उसके विषय में डॉक्टर मिश्रा ने बताया रीवा में ऑक्सीजन प्लांट प्रारंभ कर दिया गया है जिससे पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है परंतु क्योंकि मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है उसकी वजह से नए मरीजों के एडमिशन में समस्या उत्पन्न होती है जिसे अस्पताल प्रबंधन डील करने का प्रयास कर रहा है। सभी लोगों को धैर्य बनाकर स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टर मिश्रा के सुझाव दिया और बताया की नियमित उपचार और सावधानी बरतना आवश्यक साथ मे मानशिक बैलेंस बनाये रखना आवश्यक है। डॉ मिश्रा ने कहा वर्तमान समय में जो ऑक्सीजन बनाने की पोर्टेबल मशीनें आ रही है उनके विषय में आरटीआई लगाकर उनकी गुणवत्ता और उसके लागत के विषय में जानकारी प्राप्त की जानी चाहिए। संभव हो तो क्योंकि मामला जीवन से जुड़ा हुआ है अतः 48 घंटे के भीतर जानकारी प्राप्त की जानी चाहिए।

🔸 प्यास लगी तो कुंआ खोदने वाली कहावत चरितार्थ हो रही है – सूचना आयुक्त राहुल सिंह

उधर मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि देखा जाए तो कोरोना महामारी के 1 वर्ष के बाद भी इससे लड़ने के समुचित प्रयास नहीं किए गए जिसकी वजह से इसका जो दूसरा फेज है काफी तीव्रता से अटैक किया है। यदि पहले से व्यवस्था की जाती तो बेहतर होता। मेडिकल क्षेत्र में सूचना के अधिकार कानून और पारदर्शिता और जवाबदेही के विषय में बोलते हुए सूचना आयुक्त ने बताया कि मेडिकल क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी है जिसकी वजह से समस्या पैदा हुई है। राहुल सिंह ने कहा कि प्राइवेट मेडिकल अस्पताल और क्लीनिक को फर्जी और गलत ढंग से मान्यताएं मिल रही है जहां ऐसे निजी अस्पतालों में पर्याप्त बेड और पर्याप्त डॉक्टर बताकर व्यवस्था के नाम पर मान्यता ले ली जाती है लेकिन कोरोना वायरस जैसी स्थिति में इनकी पोल खुल जाती है क्योंकि एक तरफ तो ऐसी अस्पतालों में सैकड़ों खाली बेड बताए जा रहे हैं लेकिन जब मौके पर जाते हैं तो कहीं न तो बेड हैं और न ही डॉक्टर। हमारे पूरे सिस्टम में भ्रष्टाचार व्याप्त होने की वजह से यह समस्या आ रही है। शायद अब कोरोनावायरस जैसी महामारी निर्मित होने के बाद आगे कुछ सुधार हो सके।

हमारा देश कोरोना की दूसरी लहर के लिए तैयार नहीं था – शैलेश गांधी

कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में पधारे पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने बताया कि जो परिस्थितियां निर्मित हुई हैं उससे यह स्पष्ट है कि हमारा देश कोरोनावायरस की दूसरी लहर के लिए तैयार नहीं था। शैलेश गांधी ने डॉक्टर धीरेंद्र मिश्रा और उनके जैसे अन्य डॉक्टर की प्रशंसा करते हुए कहा यह सब महान लोग हैं जिन्होंने दिन-रात एक कर मरीजों की सेवा की है और निरंतर अपने कर्तव्य पथ पर लगे हुए हैं। आज भारत को ऐसे कर्तव्यनिष्ठ डॉक्टर की जरूरत है। वर्तमान परिवेश में आरटीआई लगाए जाने के विषय में शैलेश गांधी ने कहा की सूचना का अधिकार और अन्य व्यवस्थाएं कागजी कार्यवाही पर आधारित हैं जिनके लिए समुचित समय होना चाहिए। लॉक डाउन और स्टाफ की कमी के चलते अब वर्तमान में जबकि पूरा देश और पूरा विश्व कोरोना संक्रमण काल से गुजर रहा है ऐसे में किसी भी कार्यालय पर आरटीआई लगाकर जानकारी मांगना लोगों और कर्मचारियों के साथ-साथ स्वयं अपने जीवन को संकट में डालने जैसा है। जब स्थितियां कुछ हद तक सुधर जाएं तब आरटीआई लगाकर कोरोना लॉकडाउन और इससे संबंधित अन्य मेडिकल क्षेत्र की जानकारियां प्राप्त की जा सकती है और यह प्रयास किया जाना चाहिए कि जिस प्रकार राहुल सिंह ने बताया कि अधिक से अधिक जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 4 के तहत पब्लिक में साझा की जानी चाहिए जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे और मरीजों को इस बाबत न भटकना पड़े कि उन्हें ऑक्सीजन कहां मिलेगी अथवा बेड कहां मिलेगा या दवाइयां कहां मिलेगी।

कर्नाटक में मेडिकल क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी के चलते जानकारी नहीं मिलती – वीरेश बेल्लूर

  कर्नाटक से पधारे वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता एवं आरटीआई स्टडी सेंटर के ट्रस्टी वीरेश बेलूर ने बताया की लगभग पूरे भारतवर्ष जैसे ही कर्नाटक की भी स्थिति बनी हुई है जहां मेडिकल क्षेत्र में पारदर्शिता की बहुत कमी है और बहुत सी जानकारियां आरटीआई लगाए जाने के बावजूद भी आवेदकों को उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल, प्राइवेट क्लीनिक और फार्मा कंपनी से संबंधित जानकारियां नहीं मिल पाती हैं क्योंकि इसके पीछे रसूखदार और बड़े माफिया किस्म के लोगों का हाथ रहता है। फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल क्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप और माफिया के चलते जानकारियां बाहर नहीं आने दी जाती और इस पर मात्र कुछ गिने चुने रसूखदारों का अधिपत्य बना हुआ है। इसके लिए सबसे बड़ी बात यह है कि आम जनता को एक मुहिम और आंदोलन चलाना पड़ेगा और जानकारियां बाहर लाने के लिए मांग करनी पड़ेगी। उम्मीद की जाती है कि कोरोनावायरस से सबक सीखते हुए भविष्य में व्यवस्थाओं में सुधार होगा।

मेडिकल क्षेत्र में सोशल ऑडिट की आवश्यकता वर्तमान समय की माग- भास्कर प्रभु

 मुंबई से वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता एवं माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक भास्कर प्रभु ने बताया कि जिस प्रकार मनरेगा और अन्य कार्यों के लिए सोशल ऑडिट की जाती है ठीक उसी प्रकार मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी हुई संस्थानों जैसे अस्पताल, क्लीनिक, प्राइवेट अस्पताल, फार्मास्युटिकल्स दवा कंपनियां आदि के लिए भी सोशल ऑडिट की जानी चाहिए। मेडिकल ऑडिट आफ डेथ के विषय में चर्चा करते हुए बताया गया यह ऑडिट भी अन्य ऑडिट की तरह ही होता है जिसमें किसी भी मृत व्यक्ति का इलाज के दौरान क्या-क्या दवाइयां उपयोग की गई, किन परिस्थितियों में उसकी मृत्यु हुई, यह सब जानकारियां और टोटल रिपोर्ट मेडिकल ऑडिट ऑफ डेथ में होती है। 

कोरोना टीका के बाद होने वाली मृत्यु दर की हो रही स्टडी

भास्कर प्रभु ने बताया कि वह कोविड-19 की मृत्यु से जुड़े हुए लोगों के विषय में आरटीआई लगाकर जानकारियां प्राप्त कर रहे हैं और इस विषय में सोशल ऑडिट का भी सहारा ले रहे हैं। उनका ध्यान उन लोगों पर ज्यादा है जिन्हें कोविड-19 का टीका लगाया गया है और टीका लगाने के बाद उनकी किन परिस्थितियों में मृत्यु हो रही है इस विषय पर आरटीआई लगाकर कार्य कर रहे हैं। सामान्य तौर पर यह सब कार्य किसी व्यक्ति विशेष या एक-दो व्यक्तियों के नहीं हो सकते बल्कि इस विषय पर बल देते हुए भास्कर प्रभु ने कहा कि वह मुंबई में भी यही उम्मीद करते हैं कि जहां 32000 करोड रुपए का बजट मात्र मुम्बई म्युनिसिपल के विकास के लिए आ रहा है वहां प्रत्येक 1 से 2 किलोमीटर के बीच में कोई एक्टिव आरटीआई विषय में कार्य करने वाले व्यक्ति होने चाहिए जिससे इस मुहिम को और आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि उनकी उम्र 60 वर्ष हो चुकी है और अब वह कितने दिनों तक सेवा दे पाएंगे इसलिए बहुत लोगों को आगे आने की आवश्यकता है अन्यथा हमारे देश में सुधार नहीं हो पाएगा। जनता को जागरूक होने की जरूरत है और सभी सामाजिक हितों के कार्य के लिए मिलकर आंदोलन करने की आवश्यकता है।

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प्रतिभागियों ने पूछे प्रश्न और विशेषज्ञों ने दिए जबाब

इस बीच कार्यक्रम में अन्य प्रतिभागियों ने भी सूचना के अधिकार से जुड़े हुए अपने प्रश्न पूछे जिसका उन्हें जवाब मिला। छत्तीसगढ़ से मेशराम ने पूछा की उन्होंने सूचना आयोग में आरटीआई लगाया और जानकारियां प्राप्त की, अपील की। अपील के बाद जानकारी देने के आदेश भी हुए लेकिन आज दिनांक तक उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है जबकि उनकी माँ कोविड से पीड़ित है और उन्हें बर्खास्त कर पेमेंट को रोक दिया गया है। उनका मामला कोर्ट में भी चल रहा है लेकिन अब तक उसका समाधान नहीं निकल पाया। इस विषय पर मार्गदर्शन देते हुए मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि उन्हें हाई कोर्ट में जाना चाहिए जहां उन्हें रिलीफ मिलेगी। विशाल ने पूछा कि पुलिस ने उन्हें गलत ढंग से डिटेन कर लिया था और मुकदमा दर्ज किया जिसके विषय में आरटीआई लगाकर थाने की वीडियो फुटेज मागी तो बताया गया कि 15 दिन के बाद फुटेज नष्ट कर दिया जाता है जिसके विषय में सूचना का अधिकार लगाकर पुलिस मुख्यालय से जानकारी प्राप्त किए जाने हेतु सलाह दी गई। जीवन कुमार ने बताया कि दिल्ली में एंटी करप्शन ब्यूरो के एक अधिकारी ने सात हजार करोड़ का मेडिकल फील्ड में घोटाला पकड़ा था और नड्डा के ऊपर तक एफ आई आर दर्ज करवाया था लेकिन बाद में उस अधिकारी को प्रताड़ित कर वहां से भगा दिया गया और उल्टा उसके ऊपर कार्यवाही करवा दी गई। इस विषय पर बताया गया कि जब रसूखदार और माफिया किस्म के लोग चंगुल में फंसते हैं तो सब हथकंडे उपयोग करते हैं ऐसे में जनता को भी मच्छर अधिकारियों अच्छे अधिकारियों के पक्ष में आना चाहिए और आंदोलन करना चाहिए। 
जयपाल सिंह खींची राजगढ़ से जानना चाहा कि क्या ऑक्सीजन सिलेंडर प्राप्त करने के लिए एसडीएम से परमिशन लेनी पड़ती है क्योंकि उनके क्षेत्र में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसके बाद दूसरे दिन ऑक्सीजन सिलेंडर मिलने के बाद पीड़िता की मौत हो गई थी। इस विषय पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बताया ऐसा की ऐसा कोई नियम बनाया जाता है तो इसके लिए विधिवत पत्र जारी किया जाता है जो आरटीआई लगाकर प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार कई अन्य प्रतिभागियों ने भी प्रश्न पूछे और उनका समाधान प्राप्त किया।

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