बिना पैसे के नहीं होता जिला परिवहन कार्यालय में काम/ दलालों के माध्यम से बाबू मांगता है पैसा और साहब का हिस्सा/ आखिर कब लगेगा घूसखोरी पर लगाम/ शिवराज के राज में नहीं लग पा रहा भ्रष्टाचार पर लगाम

बिना पैसे के नहीं होता जिला परिवहन कार्यालय में काम

दलालों के माध्यम से बाबू मांगता है पैसा और साहब का हिस्सा

आखिर कब लगेगा घूसखोरी पर लगाम

शिवराज के राज में नहीं लग पा रहा भ्रष्टाचार पर लगाम

संदीप तिवारी/ खुलासा। शहडोल संभाग:- उमरिया/ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार लगातार वादा कर रही है कि भ्रष्टाचार भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शिकंजा कसा जा रहा है कोई भी विभाग के अधिकारी या कर्मचारी घूस मांगने पर उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी लेकिन उमरिया जिले में इसका सीधा उल्टा ही हो रहा है जिला मुख्यालय उमरिया में भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार पनपता हुआ नजर आ रहा है बिना घूस के आईटीओ कार्यालय में कोई भी काम नहीं होता है चपरासी से लेकर बाबू एवं अधिकारी तक भारी भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं लेकिन मध्य प्रदेश के मुखिया इस पर कोई उचित कार्यवाही करना चाहिए कार्यालय में कहीं दलाल तो कहीं बाबू पैसा मांगते हुए नजर आते हैं लगातार देखा जा रहा है कि लोकायुक्त के द्वारा बाबू और अधिकारियों के ऊपर कार्यवाही कर रहे हैं उसके बावजूद इस भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग रहा है जिसका जीता जागता उदाहरण है कि आज भी जिला परिवहन कार्यालय (आईटीओ विभाग) भारी भ्रष्टाचार से डूबा हुआ है जिस पर लगाम लगाने के लिए कोई उचित कार्यवाही होनी चाहिए

जब जिम्मेदारी बन जाए लूटेरे तो कहां लगेगा घूसखोरी में अंकुश

उमरिया का आरटीओ कार्यालय सुधरने का नाम नहीं ले रहा है, विभाग लाख दावा करें कि आरटीओ ऑफिस में कोई भी दलाल नहीं है, लेकिन हकीकत यह है कि बिना दलालों के यहां का कोई काम नहीं होता, परिवहन विभाग के बाबूओं की मिलीभगत से दलाल लर्निंग और परमानेंट लाइसेंस, फिटनेस सहित अन्य कार्याे के लिए 8 से 10 गुना फीस वसूल रहे हैं आरटीओ कार्यालय में इस समय दलाल पूरी तरह हावी होने का आलम यह है कि यहां विभागीय काम से आए लोगों को खिड़कियों के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ता है, फाइलों में छोटी-छोटी कमियां निकाल कर या तो वापस कर दिया जाता है या फिर जनता को अनावश्यक रुप से परेशान किया जाता है। वहीं दलाल विभाग में कार्यरत बाबू की टेबल पर जाकर फटाफट फाइलें ओके करा कर आ जाते हैं, आरोप है कि दलाल लर्निंग लाइसेंस 3000 और परमानेंट लाइसेंस के 6000 लेते हैं, इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि आरटीओ कार्यालय पूरी तरह दलालों की गिरफ्त में है।

हर टेबल पर लगता है पैसा :

आरटीओ कार्यालय में हर टेबल का दाम तय है, लाइसेंस के लिए जब आम आदमी आवेदन करके आरटीओ दफ्तर आता है तो, उसे कई चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन लाइसेंस नहीं बनता टेस्ट में फेल होने के बाद या अन्य कारणों से उसका लाइसेंस नहीं बन पाता, जिससे उन्हें मजबूरी में दलालों के माध्यम से ही लाइसेंस बनवाने को बाध्य होना पड़ता है, आरटीओ कार्यालय में काम करने वाले एजेंट से पैसों का मोलतोल करो तो उनका कहना होता है यहां हर टेबल पर पैसा देना होता है, यही कारण है कि हर काम के लिए 2 से 3 गुना अधिक राशि लोगों को देनी पड़ती है।

शिवराज के राज में नहीं लग पा रहा भ्रष्टाचार पर लगाम

प्रदेश सरकार ने परिवहन विभाग को अधिकांश सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया है, लेकिन विभाग को दलालों के चंगुल से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि गाड़ी ट्रांसफर करवाने के नाम से बाबू दलालों के माध्यम से पैसा मांगता है और न देने पर बाबू के द्वारा कागजी कार्यवाही वहीं पर रोक दी जाती है और ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर चाहन हस्तांतरण और परमिट, नवीनीकरण समेत तमाम काम दलालों के जरिए ही हो रहे है। ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान ही आवेदक को तमाम प्रलोभन देकर वसूली की जाती है। वहीं विभागीय अफसरों की अनदेखी के चलते सरकार की योजना फेल हो रही है और दिन पर दिन भ्रष्टाचार बढ़ते हुए नजर आ रहा है ।

उमरिया में 181 फैल नहीं होती सुनवाई

मध्य प्रदेश शासन के द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 181 जो कि लोगों की समस्या का निराकरण करने के लिए बनाया गया है लेकिन उमरिया जिले में देखा जा रहा है कि इस 181 की शिकायत करने के बावजूद भी कोई निराकरण नहीं किया जाता हमेशा विभाग के द्वारा गोलमोल जवाब देकर 181 को बंद कर दिया जाता है जिसमें उच्च अधिकारी के द्वारा कोई भी जांच नही की जाता है कि यह शिकायत आखिर क्यों बंद हुई मध्यप्रदेश शासन को 181 में किए गए शिकायत को उच्च लेवल से जांच करवाते हुए संबंधित अधिकारियों के ऊपर उचित कार्यवाही करनी चाहिए

यह रहा आईटीओ कार्यालय का मामला

मध्य प्रदेश ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के माध्यम से गवर्नमेंट को गाड़ी का 13740 रुपए टैक्स दिया गया एवं बिक्री नामा के साथ जिला परिवहन कार्यालय मे संपूर्ण दस्तावेज संलग्न कर एवं बाबू कैलाश शर्मा के समक्ष आवेदक उपस्थित होकर गाड़ी सीन करवाया गया एवं क्रेता एवं विक्रेता का संपूर्ण दस्तावेज उसी दिनाक 10-11-2022 कागज की कार्यवाही पूरी करवा ली गई लेकिन आज कई महीनों बीत जाने के बाद भी गाड़ी ट्रांसफर की कार्यवाही जिला परिवहन कार्यालय से नहीं किया गया कई बार इस संबंध में संजय श्रीवास्तव जिला परिवहन कार्यालय के अधिकारी को मैसेज किया की बाबू आप के नाम से पैसे एजेंट के माध्यम से मांगता है तो कहां पर कोई भी जवाब नहीं आया मैसेज देखने के बाद भी और कई बार फोन किया गया तो भी अधिकारी महोदय को फोन उठाने में भारी दिक्कत परेशानी हो रही है टेक्स्ट मैसेज के माध्यम से भी जानकारी दी गई कि आपके कार्यालय में कई महीनों से आवेदक की फाइल पड़ी हुई है जो कि ट्रांसफर नहीं हो रहा है और एजेंट के माध्यम से बाबू कागजी कार्यवाही के नाम से पैसा मांगता है कि साहब को और मुझे पैसा चाहिए नहीं तो काम नहीं होगा जिसका जीता जागता उदाहरण है कि आज तक सरकार को गाड़ी का टैक्स देने के बाद भी गाड़ी का ट्रांसफर की कार्यवाही नहीं की गई फाइल जो कि कार्यालय में धूल डस्ट खा रहा है

सरकार को टैक्स देने के बाद भी बाबू और साहब को देना पड़ता है टैक्स

तो क्या जिला परिवहन कार्यालय में बिना बाबू और साहब को टैक्स दिए बिना कोई काम नहीं होगा गाड़ी ट्रांसफर के नाम से गवर्नमेंट को टैक्स जमा करने एवं गाड़ी की संपूर्ण दस्तावेज सबमिट करने के बाद बाबू के कार्यालय में चेचिस नंबर व क्रेता एवं विक्रेता की फोटो सिग्नेचर अन्य प्रक्रिया होने के बावजूद आज कई महीनों से फाइल बाबू के चेंबर में ही घूमते हुए नजर आ रही है आलम यह है कि जिस पोर्टल के माध्यम से गवर्नमेंट को टैक्स दिया गया था वह साइड ही बंद हो गई तो बाबू के द्वारा उस फाइल को एजेंट को दे दिया जाता है बिना काम किए हुए हैं और तो और कब कार्यालय की फाइल दलालों के हाथ में पहुंच जाती है और अधिकारी को भनक नहीं लगती यह बात तो समझ से परे है आलम यह है कि जिला परिवहन कार्यालय मे बाबू और दलालों के माध्यम से पूरा सिस्टम फेल नजर आ रहा है वही कार्यालय में पदस्थ उदय भान से लगातार संपर्क करने की कोशिश की जा रही है लेकिन उनके द्वारा ना तो फोन उठाया जा रहा है ना ही किसी प्रकार की जानकारी दी जा रही है और ना ही जिला परिवहन अधिकारी के द्वारा ना ही फोन उठाया जाता ना जानकारी दी जाती है

कैम्पस में दलालों का डेरा जिम्मेदार अधिकारी सोए गहरी निंद्रा में

परिवहन कार्यालय में बगैर दलाल से मिले कोई भी काम हो पाना संभव नहीं है। इतना ही नहीं परिवहन अधिकारी द्वारा बकायदा इन्हें कैम्पस के अंदर मूक सहमति प्रदान की गई है। जिसके चलते इनका डेरा कैम्पस में ही लगा रहता है। कोई भी व्यक्ति किसी भी काम से कार्यालय जाता है तो, उसे पहले दलालों से होकर ही गुजरना पड़ेगा। परिवहन कार्यालय में दलाल का सिक्का चलता है, एक लायसेंस बनवाने में दलालों द्वारा 2500 से 5000 रुपये लिए जाते है, साफ कहा जाता है कि पांच सौ रुपये की आनलाइन रशीद कटती है, बाकि पैसा अधिकारी तक जाता है, तब तो समय पर लायसेंस मिलेगा, नहीं तो कार्यालय के चक्कर लगाते रहो यह रोना है जिला परिवहन कार्यालय का।

बाबु ने सम्हाल रखी है साहब की कुर्सी

नियमों को ताक पर रखकर जिला परिवहन कार्यालय में नियम के विरुद्ध पूरा काम धड़ल्ले से चल रहा है लायसेंस बनवाने पर न तो आपको गाड़ी चलाकर दिखाना है न ही गाड़ी लेकर जाना है। मजबूरी बस आवेदक दलाली की शरण ले लेता है। परिवहन अधिकारी को उमरिया के साथ ही सतना जिले का भी प्रभार है, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि साहब कितने दिन उमरिया में रहते होंगे, हालांकि ऑफ रिकार्ड उनकी कुर्सी बाबू और दलाल के माध्यम से संचालित हो रहा है परिवहन कार्यालय में बिना दलाल सहारा लिये नियम कानूनों को इतनी लंबी दुहाई दी जाती है कि बखूबी सम्हाल रखी है। उसे सुनकर ही आवेदक परेशान हो जाता है। चचा‌ है कि बकायदा परिवहन अधिकारी का महीना बंधा हुआ है, जिसके चलते दलालों के काम पहले होते है, बाद में अन्य लोगो का इतना ही नहीं दलालों के परिवहन कार्यालय में दलालों की “चांदी” है। परिवहन विभाग दलाल का बस चलता है, विभाग के इर्द-गिर्द दलालों का जमघट आबाद है। प्रभारी अधिकारी ने भी ‘स्वयं’ का हित देखते हुये ‘सख्ती खत्म के साथ दलालों को ऑफ रिकार्ड कमान सौंप रखी है। साहब के पास दो जिले का प्रभार होने चलते एक जगह साहब, तो दूसरी जगह बाबू खिसाब-किताब देख रहा है।

दलालों के जाल में फंस रही फाइल और आवेदक

आखिरकार कब बंद होगा घूसखोरी मुख्यालय स्थित आईटी विभाग में रेट फिक्स किए हुए हैं। परिवहन कार्यालय के अंदर ही दलाल घूमते मिल जायेंगे और यहीं से पूरा खेल चलता है। जिन कामों के लिए आवेदक एक-एक महीने तक भटकते है, ये काम दलाल आसानी से कुछ दिनों में कराने का दावा करते हैं। आरटीओ कार्यालय में प्रतिदिन दर्जनों की संख्या में वाहन फिटनेस के लिए पहुंचते हैं। यहां पर भी दलालों का पूरा राज कायम है। सरकार ने फिटनेस के लिए शुल्क तय किया है। लेकिन दलाल ही वाहन स्वामी के कागजात लेकर विभाग के पटलों पर पहुंचते हैं। इन पर लगाम लगाने में विभाग पूरी तरह से नाकाम है। ऑफ रिकार्ड परिवहन कार्यालय का जिम्मा बाबू संभाल रखा है, दो जिले के परिवहन अधिकारी होने के चलते साहब का जिले में आना-जाना कम ही होता है, जानकारों की माने तो जो लोग नहीं जानते वह बाबू को ही परिवहन अधिकारी मानकर अपना काम उनसे कराने पहुंच जाते है। और महीने में अगर साहब के उपस्थिति हुई तो फाइलों में साइन करके अपना हिसाब किताब कर लिया जाता है

समानांतर व्यवस्था चला रहे दलाल

आरटीओ ऑफिस के बाहर जमा दलाल समानांतर व्यवस्था चला रहे हैं। हर काम के लिए उन्होंने दाम तय कर रखे हैं। कार्यालय में बिना दलाल के डीएल या गाड़ी से संबंधित काम कराने पर काउंटर पर बैठने वाले कर्मचारी बेवजह दौड़भाग कराते हैं। इसका फायदा उठाते हुए दलाल पब्लिक से पैसे वसूलने में कामयाब रहते हैं। कर्मचारी और दलाल की मिलीभगत से परिवहन अधिकारियों से सांठ-गांठ की चर्चा संभाग तक बनी हुई है। एक बार फिर दलाल ने परिवहन अधिकारी से सांठ-गांठ कर परिवहन कार्यालय चलाने मे सफलता मिल रही है प्रदेश सरकार ने परिवहन विभाग की सेवाएं ऑनलाइन भले ही कर दी हैं, लेकिन विभाग में होने वाले तमाम आवेदन पत्र में काफी जटिलताएं हैं। यह है कि विंग लाइसेंस से लेकर वाहन नवीनीकरण कराने का आवेदन पत्र आवेदक खुद भर नहीं सकते। इसके चलते आवेदकों को दलालों की शरण लेनी पड़ती है। प्रभारी परिवहन अधिकारी बाबू और दलाल से मिल कर खेल खेला जा रहा है।

संदीप तिवारी खुलासा उमरिया 

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