Tuesday, 27 June, 2023

डॉक्टर की कमी से जूझ रहा है नौरोजाबाद_स्वास्थ्य सुविधा बेहतर हो सके इसकी चिंता करें प्रदेश सरकार

डॉक्टर की कमी से जूझ रहा है नौरोजाबाद

भगवान भरोसे चलाती है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

उमरिया मे स्वास्थ्य सुविधा बेहतर हो सके इसकी चिंता करें प्रदेश सरकार

 

संदीप तिवारी:- नौरोजाबाद:- उमरिया जिले नौरोजाबाद तहसील अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अव्यवस्था का शिकार हो गया है चौमुखी विकास दावा करने वाली सत्ता में काबिज भाजपा सरकार केबल बिल्डिंग बनाने तक सीमित रह गई है जब से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नौरोजाबाद की स्थापना हुई है एक डॉक्टर कुछ दिनों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आए और कुछ दिनों में अपनी छुट्टी करवा कर दूसरे स्थान चले गए तब से यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नर्सों या कहे की भगवान भरोसे चल रहा है

बघेल साहब का सिर्फ नाम कर रही है नर्स काम

बीएमओ डॉक्टर के एल बघेल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपना टाइम नहीं दे पाते हैं अपने घर में निजी क्लीनिक पर ज्यादा ध्यान देते हैं या फिर घटना दुर्घटना हो जाने में पर पीएम करने और अन्य कार्यों में ज्यादा बिजी रहने के चलते डॉ बघेल स्वास्थ्य केंद्र में लोगों के इलाज के लिए अपना टाइम नहीं दे पा रहे हैं दूरदराज से लोग छोटी- बड़ी बीमारी का इलाज करवाने लोग आते हैं जिन का इलाज वहां पर उपस्थित नर्सों के द्वारा किया जाता है और उन्हें दवाई देकर भेज दिया जाता है यूं कहे तो कुछ दवाइयां वहां पर उपलब्ध ही नहीं रहती है जिसके चलते लोग प्राइवेट दवाई करवाने के लिए जाते हैं

छोटी-मोटी बीमारियों को लेकर भटकते हैं जनता

यू कहे तो किसी भी सरकार का प्राथमिक दायित्व है कि लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों और उन्हें इसके लिए भटकना न पड़े। सड़क, बिजली, पानी एवं स्वास्थ्य सुविधा जिनसे हर वर्ग जुड़ा रहता है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदेश सरकार को उचित कदम उठाते हुए डॉक्टरों की कमी को पूरी करनी चाहिए नौरोजाबाद के स्वास्थ सुविधा को देखते हुए सत्ता में काबिज क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि को आमजन की चिंता करते हुए स्वास्थ सुविधा को बेहतर बनाने के लिए डॉक्टरों की कमी को दूर करना चाहिए

और लोगों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके उसकी चिंता क्षेत्रीय विधायक को करना चाहिए जिला मुख्यालय जिला चिकित्सालय के साथ सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कमी को देखते हुए तत्काल कमियों को दूर करना चाहिए कि कोई भी आदिवासी ग्रामीण नगर से जिला में पहुंचकर वहां से रेफर ना किया जाए उनको जिले मेें ही सुविधा प्रदान हो जाए

रेफर या प्राइवेट हॉस्पिटल दिखा दिया जाता है रस्ता क्यों

अधिकतम देखा जा रहा है कि छोटे-छोटे मामलों में रेफर की स्थिति बन जाती है और डॉक्टर के द्वारा उसे कटनी,जबलपुर, या शहडोल प्राइवेट हॉस्पिटल रेफर कर दिया जाता है जहां पर उन गरीब आदिवासियों को अपने इलाज करवाने के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ती है क्योंकि कोई भी प्राइवेट हॉस्पिटल में बिना पैसे के कोई भी इलाज नहीं होता है

जहां प्रदेश सरकार गरीबों के लिए अनेक योजनाएं लाकर उनके हित में काम कर रही है तो एक उचित कदम उठाते हुए स्वास्थ सुविधा के कमी को ध्यान देना चाहिए है और उसे दूर करने के लिए एक पहल जिम्मेदारों के द्वारा करना चाहिए जिससे कि भविष्य में कोई भी ऐसी अनहोनी दुर्घटना ना हो जिससे कि यहां के क्षेत्र के लोगों को कोई परेशानी हो और डॉक्टरी इलाज ना मिल सके और रेफर कर दिया जाए लोग अपने इलाज के लिए दर-दर भटके प्रदेश में बैठी शिवराज सिंह की सरकार को चिंता करना चाहिए प्रदेश सरकार हमेशा अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत रहे, लेकिन जब अव्यवस्था हावी हो जाती है तो सभी प्रयास धरे के धरे रह जाते हैं और लोगों के हिस्से परेशानी के सिवा कुछ नहीं आता। नतीजतन लोग इलाज के लिए भटकते रहे, पर उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं रहता है। सरकारी प्रयास के बावजूद एक सच यह स्थिति अकेले जिला अस्पताल की नहीं है, बल्कि प्रदेश का हर अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। अधिकतर चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ के पद पूरे नहीं भरे गए हैं। शायद ही ऐसा कोई अस्पताल हो जहां पर सभी चिकित्सक उपलब्ध हों, लेकिन व्यवस्था बनाने का जिम्मा किसका है, जिससे लोगों को परेशान न होना पड़े। मेडिकल कॉलेज से निकलने वाले डॉक्टर पढ़ाई करने के बाद अच्छे पैकेज के लालच में पलायन कर रहे हैं। जुर्माने का प्रावधान होने के बावजूद वे प्रदेश में नहीं रहना चाहते। डॉक्टर प्रदेश में ही रुकें, इसके लिए सशर्त दाखिले के साथ बेहतर पैकेज देने चाहिए। इससे प्रदेश से चिकित्सकों का पलायन भी रुकेगा और संस्थानों में इनकी कमी का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए त्वरित कदम उठाने होंगे

सोशल मीडिया में आया था मामला

नौरोजाबाद तहसील अंतर्गत मसूरपानी निवासी महिला जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी सुबह से शाम तक भर्ती रही शाम को नौरोजाबाद से उमरिया रिफर कर दिया गया परिजनों ने वहां से शाम को उमरिया जिला अस्पताल पहुंचे लेकिन वहां भी उस महिला का इलाज संभव नहीं हुआ क्योंकि आपरेशन होना था दर्द से तड़प रही थी महिला लेकिन हास्पिटल में बेहोशी के डांक्टर नहीं होने से फिर उस महिला को कटनी रेफर कर दिया गया था ऐसे कई अनेक मामले हैं जिसमें जिले की जनता को रेफर का सामना करना पड़ता है छोटी से बड़ी बिमारीयो का इलाज उमरिया में हो सके इसकी चिंता बच्चो के मामा मध्यप्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को करने की जरूरत है आज कोई सुनने वाला नहीं है दूर दराज से चल कर आदिवासी भोली भाली जनता हॉस्पिटल जाती है घंटों यहां वहां भटकते रहते हैं और डॉक्टर मिलते भी हैं तो रेफर लिख के पाला झाड़ लेता है

देश विदेश में प्रसिद्ध बांधवगढ़ फिर भी असुविधा का शिकार

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के बांधवगढ़ नेशनल पार्क देश और विदेश तक में प्रसिद्ध है देश-विदेश से लोग यहां बाघों के साथ अन्य चीजों का दीदार करने आते हैं कई हफ्तों तक यहां बिताते हैं बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां तक यहां आ चुके है कहते हैं ना कि नाम बड़े और दर्शन छोटे नाम तो विदेशों तक फेमस है लेकिन यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था की बात की जाए लोगों के हिस्से में आती है केवल परेशानियां जो आज तक दूर नहीं की गई जिस को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि को मुख्यमंत्री से मांग को रखते हुए मांग जल्द पूरी करवाने की पहल करनी चाहिए

स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर नहीं, जरुरी दवाइयां गायब, डॉक्टर ड्यूटी से नदारद

स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में डॉक्टर की कमी है। तमाम उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल हैं। लेकिन फिर भी ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में ये किसी काम के नहीं। कारण है करोड़ो रुपए खर्च करने के बावजूद संसाधनों का घोर अभाव! कहीं चिकित्सक और विशेषज्ञ नहीं हैं तो कहीं स्टाफ नर्स व अन्य स्वास्थ्यकर्मी। उप स्वास्थ्य केंद्र में तो खांसी-जुकाम की मामूली दवा ही वक़्त पर मिल जाए इसीलिए भोले भाले आदिवासी ग्रामीण लोक झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाने के लिए मजबूर हैं उनके इलाज से कई लोगों की जान जा रही है वही गनीमत है। जरुरी स्वास्थ्य जांचे होना तो दूर की कौड़ी हैं। CHC यानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी रेफर सेंटर से अधिक कुछ नहीं रह गए हैं। इन सबसे बड़ी बात तो ये कि स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर के ना होने की वजह से गरीब ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टरों के मौत के शिकार हो रहे हैं या तो फिर महंगे अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार कागज़ों में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए स्वास्थ्य केंद्र बनाने और उनमें उन्नत तकनीक की स्वास्थ्य सुविधाएँ लाने में करोड़ो खर्च का दावा तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन स्वास्थ्य केंद्रों में बेसिक स्वास्थ्य सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसके चलते प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के मोर्चे पर बुरी तरह पिछड़ रहा है। पढ़िए राज्य की चरमराई हुई स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार के खोखले दावों की पोल खोलती दिख रही है अखिरकार कब तक आमजन की यह परेशानी दूर होगी ये तो समझ से पारे है

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