Monday, 3 July, 2023

अवैध क्लीनिक संचालक समीर के दस्तावेज की हो जांच

अवैध क्लीनिक संचालक समीर के दस्तावेज की हो जांच

जांच में होंगे कई बड़े खुलासे

राजनीतिक दबाव के कारण नहीं हो रही समीर के ऊपर कार्यवाही

उमरिया:- जिले के नौरोजाबाद तहसील अंतर्गत समीर कुमार अधिकारी पिता सतीश चंद्र अधिकारी पांच नंबर कॉलोनी नौरोजाबाद अवैध क्लीनिक संचालन कई वर्षों से कर रहा है कई बार स्वास्थ विभाग ने क्लीनिक को सील कर दिया लेकिन सांठगांठ से क्लीनिक फिर से संचालित होने लगी स्वास्थ विभाग मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आरके मेहरा और बीएमओ साहब की मानें तो यह झोलाछाप डॉक्टर है इसके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं है इसके पास जिला स्वास्थ्य कार्यालय उमरिया में इसका रजिस्ट्रेशन नहीं है

नियम के विरुद्ध यह अपने निजी घर में क्लीनिक संचालित कर रहा है इसके खिलाफ स्वास्थ विभाग उमरिया न्यायालय में इसके विरुद्ध परिवारवाद माननीय न्यायालय में दाखिल किया गया है जो कि न्यायालय में विचाराधीन है सूत्रों की माने तो ये रहा पुरा मामला एक ग्राम पंचायत निपनिया निवासी महिला को गलत सुई लगाकर मौत के घाट उतार दिया था इसकी ऑडियो उपलब्ध है और एक 16 साल के युवक को ग्लूकोस की बोतल चढ़ाया इसके कारण उसका शुगर बढ़ गया और उसकी हालत खराब हो गई इसको तुरंत पाली हॉस्पिटल लेकर गए जिसकी मृत्यु हो गई थी सूत्रों; मुंडी खोली निवासी महिला की भी मौत गलत इलाज के दौरान हुई निपनिया निवासी महिला के परिजनों को 1 लाख का सौदा किया था मामले को दबाने के लिए उनके परिजनों को दिया था ग्राम पिनौरा निवासी महिला एक बैगा महिला और एक कोल महिला के कुछ महीनों के बच्चे एक का क्लीनिक में भाप दिलाते समय ही मृत्यु हो गई थी एवं दूसरी महिला का बच्चा सही सलामत घर तक नहीं पहुंच पाया उसकी मृत्यु रास्ते में हो गई थे

ऐसे कई मामले हैं जो उस फर्जी क्लीनिक के अंदर दबा हुआ है जिसकी जांच के लिए शासन-प्रशासन से लगातार मांग हो रही है लगातार शिकायतें जा रही है लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण शासन प्रशासन चाह कर भी उसमें कोई पहल नहीं कर पा रहा है ना कार्यवाही जिम्मेदारों की माने तो जैसे ही कार्यवाही किया जाता है वैसे राजनीतिक दबाव उनके ऊपर आ पड़ता है जिससे वह अपनी कुर्सी बचाने के लिए फर्जी क्लीनिक संचालक समीर अधिकारी पर कोई कार्यवाही नहीं कर पाते हैं कई लोगों की जान ले चुका यह डॉक्टर नहीं है ये लोग जान नहीं पाए और जब तक जाने तब तक बहुत लेट हो चूका था इसके दस्तावेज की जांच की मांग किस लिए उठ रही है कि यह किस राज्य किस देश से आया इसकी जानकारी लोगों तक पहुंचने चाहिए भारत की जांच एजेंसियों तक पहुंचनी चाहिए भारत सरकार तक पहुंचनी चाहिए गृह मंत्रालय तक पहुंचनी चाहिए भारत के गृहमंत्री तक पहुंचनी चाहिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा तक पहुंचने चाहिए आखिर सच्चाई है क्या कुछ गिने-चुने नेता लोगों के कारण अगर यह व्यक्ति लोगों को गुमराह कर अपनी क्लीनिक संचालित कर रहा है और लोगों की जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहा है

तो उसके ऊपर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जिसकी मांग लगातार हो रही है और होते रहेगी जिसकी जांच पुलिस विभाग के द्वारा की जा रही है और अब हाईकोर्ट से भी जाच होनी चाहिए गलत आरोप-प्रत्यारोप लगना तो यह आम बात हो गई है देश और प्रदेश में होता रहता है हालांकि यह तो सत्य की लड़ाई है जिनके मासूम बच्चे खत्म हुए उन परिजनों के साथ घर में जाकर मेडिकल वाले ने इस डॉक्टर के कहने पर मामले को दबाने की भरपूर प्रयास किया लेकिन मामला नहीं दबा उन्होंने अपने बच्चे की मौत की कीमत नहीं लगाई पूरे तरीके से राजनीतिक दबाव एवं पैसे का लालच तक दिया जब मामला नहीं बना तो समीर अधिकारी आरोप-प्रत्यारोप लगते हुए नजर आ रहे है यह तो न्यायालय सिद्ध करेगा कि कौन सा आरोप सत्य है

डॉक्टर साहब कौन असत्य है अति का अंत होता है जो होकर रहेगा जब स्वास्थ्य विभाग ने फर्जी क्लीनिक संचालक समीर अधिकारी (बंगाली डॉक्टर) नौरोजाबाद 5 नंबर कॉलोनी की क्लीनिक को सील किया गया था तो समीर अधिकारी बताएं कि वह फर्जी क्लीनिक खोलने के लिए अधिकारियों को कितना पैसा दिए है और कितने पैसे में चाभी खरीदा है जो की सील होने के बावजूद उसकी क्लीनिक कैसे खुली यह भी खुलासा होना चाहिए कि कितना पैसा जिले में झोलाछाप डॉक्टर देता है अपनी फर्जी क्लीनिक चलाने के लिए जिसके चलते आज तक बचते हुए आए हों कोई बड़ी कार्यवाही नहीं हुई धड़ल्ले से अपनी फर्जी क्लीनिक शासन प्रशासन के नाक के नीचे चलाते हुए नजर आ रहा है

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