Wednesday, 14 June, 2023

अतिक्रमण की चपेट में पीसाझोडी की सरकारी भूमि, निजी भवन में संचालित हो रहे आंगनवाड़ी भवन जयस के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने जनसुनवाई में की शिकायत, अतिक्रमण हटाने की मांग

बैतूल। घोड़ाडोंगरी तहसील क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पीसाझोडी की सरकारी जमीन पर इन दिनों बेजा कब्जा किया जा रहा है। सरकारी जमीन अतिक्रमण की चपेट में होने के चलते आंगनवाड़ी भवन निजी भवन में संचालित किया जा रहा है जिससे बच्चों को आवश्यक सुविधा प्राप्त नहीं हो पा रही है। ग्राम की सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने की मांग को लेकर मंगलवार को ग्राम सरपंच सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने जयस संगठन के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर उचित कार्यवाही करने का आग्रह किया है। ग्राम सरपंच स्नेहलता इवने ने बताया कि शासकीय भवन नहीं होने के चलते सोसाइटी भी निजी भवन में संचालित हो रही है। निजी भवन छोटा एवं जीर्ण शीर्ण अवस्था में होने के चलते यहां कभी भी दुर्घटना हो सकती है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम में प्राथमिक शाला एवं माध्यमिक शाला संचालित है। प्राथमिक शाला का भवन डैम के बैक वाटर के कारण क्षतिग्रस्त घोषित किया जा चुका है। उक्त भवनों के निर्माण के लिए शासकीय भूमि की आवश्यकता है। ग्राम में आबादी एवं शासकीय भूमि उपलब्ध होने पर भी भवनों का निर्माण नहीं किया जा रहा है क्योंकि आबादी एवं शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। ग्रामीणों ने ग्राम से अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग की है ताकि शासकीय भवनों की सुविधा प्राप्त हो सके।ज्ञापन सौंपने वालों में जयस जिला अध्यक्ष संदीप कुमार धुर्वे, उपसरपंच चमन सिंह, मुकेश, अनिल, विनोद धुर्वे, गुनासिंह, पुरुषोत्तम सहित अनेक जयस कार्यकर्ता शामिल थे।
शिकायत के बावजूद नहीं हो रही कार्यवाही
जयस कार्यकर्ताओं ने बताया कि पीसाजोड़ी ग्राम पंचायत की खसरा नम्बर 83/1, 84, 134, 163, 241 / 1,261,264/1264/2 है, पर कुछ लोगो ने अवैध निर्माण तथा कब्जा कर रखा है। जयस कार्यकर्ताओं का कहना है कि बैतूल जिला राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना क्रमांक 5-3-76-384-सात-न-1 दिनांक 21 फरवरी 1977 से घोषित विनिर्दिष्ट आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में आता है। म.प्र. भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (6) (1) के तहत ऐसे क्षेत्रों में आदिवासी जनजाति के किसी भूमि स्वामी का अधिकार किसी ऐसे व्यक्ति जो कि उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किये गये क्षेत्रों में की ऐसे जनजाति का न हो द्वारा विक्रय या परिणामस्वरूप न तो अंतरित किया जायेगा और न ही अन्तरणीय होगा। उपबंधित है, इस संबंध में उन्होंने पूर्व में तहसीलदार को आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई।

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